घटक तथा उपघटक

घटक तथा उपघटक

अ)    उत्पादकता में वृद्धि

इस घटक का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना कर पशु प्रजनन और पोषण के माध्यम से गोजातीय उत्पादकता बढ़ाना है। घटक(अ) के तहत प्रस्तावित हस्तक्षेप से मुख्य अपेक्षित परिणाम हैः प्रति दुधारू पशु उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से दूध उत्पादकता में वृद्धि, दुधारू पशुओं की संख्या में वृद्धि, कृत्रिम गर्भाधान दर में सुधार, पशु पोषण में सुधार , प्रति किलो दूध के उत्पादन में आहार की लागत में कमी तथा आहार संतुलन कार्यक्रम के तहत समाविष्ट किए गए पशुओं द्वारा उत्पादित दूध के प्रति किलोग्राम मीथेन उत्सर्जन में कमी। 

इस घटक के विभिन्न उपघटक हैः

क) वीर्य उत्पादन के लिए उच्च आनुवांशिक गुणों (HGM) वाले गोवंश तथा भैंस सांडों का उत्पादन तथा जर्सी/एचएफ सांडों का आयात

i) संतति परीक्षण

ii) वंशावली चयन

iii) सॉंडों का आयात (समतुल्य भ्रूण)

ख) मौजूदा वीर्य केन्द्रों का सुदृढीकरण/उच्च गुणवत्ता, रोग- मुक्त वीर्य अंशों के उत्पादन हेतु नए केन्द्र शुरू करना

i) वर्तमान में स्थित वीर्य केन्द्रों (केवल अ तथा ब वर्गीकृत केंद्र) का सुदृढीकरण

ii) नए वीर्य केन्द्र

ग) एक पेशेवर सेवा प्रदाता के माध्यम से जीवनक्षम घर की दहलीज तक कृत्रिम गर्भाधान वितरण मानक संचालन प्रक्रियाओं पर आधारित सेवाओं के माध्यम से एक प्रायोगिक नमूने की स्थापना जिसमे पशु टैगिंग और प्रदर्शन अभिलेख शामिल हो।

घ) दुधारु पशुओं के पोषण में सुधार जिससे कि उनका दूध उत्पादन उनकी आनुवंशिक क्षमता के अनुरूप हो और मीथेन उत्सर्जन में कमी हो।

i) आहार संतुलन कार्यक्रमः डेरी किसानों को प्रशिक्षित स्थानीय जानकार व्यक्ति (एलआरपी) द्वारा स्थानीय आहार संसाधन और क्षेत्र विशिष्ट खनिज मिश्रण के साथ संतुलित आहार पर प्रसार सलाह दी जाएगी।

ii) चारा विकास - प्रसार पहल/चारा विकास के लिए हस्तक्षेप, चारा बीज उत्पादन में सुधार के लिए सहायता, ठेके पर चारा उत्पादन, परिरक्षित चारा उत्पादन का प्रदर्शन तथा संवर्धन और घनीकरण द्वारा सूखे चारे का अपव्यय कम करना

ब) वजन करने, प्राप्त दूध की गुणवत्ता परखने तथा दूध उत्पादकों को भुगतान करने के लिए गांव आधारित दूध अधिप्राप्ति प्रणाली

उत्पादकता वृद्धि के माध्यम से दूध उत्पादन में वृद्धि के प्रयासों के विस्तार के लिए दूध को उचित तथा पारदर्शी तरीके से इकट्ठा करने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की गांव आधारित दूध प्रापण प्रणाली को सहायता प्रदान की जाएगी।

गाँव स्तर के मूलभूत ढांचे के लिए निवेश करना होगा जो दूध संकलन तथा थोक में एकत्रित करने के साधन जैसे कि दूध कैन, गांवों के समूह के लिए थोक दूध शीतक, संबंद्धित मापन तथा परीक्षण उपकरण और संबंधित आईटी उपकरणों पर होगा।

इस पहल के अंतर्गत प्रस्तावित हस्तक्षेपों से हासिल किए जाने वाले संभावित मुख्य परिणाम हैः शामिल किए गए अतिरिक्त गाँवों की संख्या में वृद्धि और डेरी सहकारी समितियों और दूध उत्पादक संस्थाओं में अधिक संख्या में दूध उत्पादकों को संगठित करना।

इस घटक के तहत विभिन्न उपघटक हैं:

i.    दूध का वजन, परीक्षण और संग्रह करना

ii.    दूध को ठंडा करना

iii.    संस्थागत ढांचा बनाने के लिए सहायता

iv.    प्रशिक्षण

स) परियोजना प्रबंधन तथा अध्ययन

घटक (स) के तहत मुख्य अपेक्षित परिणाम हैः विभिन्न ईआईए के बीच परियोजना गतिविधियों का प्रभावी समन्वय, वार्षिक योजनाओं को समय पर तैयार करना और उनका कार्यान्वयन, परियोजना प्रगति तथा परिणामों की नियमित समीक्षा और रिपोर्टिंग, एक व्यापक तथा कार्यात्मक परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) तथा सीख जो सुधार एवं नवाचार का समर्थन करेगी। महत्वपूर्ण बात है कि यह परियोजना के कार्यान्वयन में शामिल कर्मियों के कौशल और ज्ञान का विकास करेगी और क्षमता में वृद्धि करेगी जो परियोजना की अवधि के बाद भी उपयोगी होगी। इस घटक के अंतर्गत विभिन्न उप- घटक हैं:

a) आईसीटी आधारित एमआईएसः- कंप्यूटरीकृत सूचना प्रणाली के संचालन और प्रबंधन के लिए सहायता जो आकड़े एकत्र करने तथा प्रजनन, पोषण और गांव आधारित दूध अधिप्राप्ति प्रणाली से संबंधित जानकारी का प्रसार करना। । परियोजना में प्रत्येक घटक/उप- घटक के लिए उचित हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए ईआईए को वित्तीय सहायता प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। इसके अलावा यह परियोजना विशिष्ट अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर के लिए ईआईए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी जो एनडीडीबी स्थित परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) द्वारा संपूर्ण निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए संपूर्ण आंकड़ों /जानकारी का संचरण करेगा.

b) अध्ययन तथा मूल्यांकनः-  ईआईए द्वारा पीएमयू को समुचित आंकड़े/ सूचना एकत्र करने और प्रजनन, पोषण तथा गांव आधारित दूध अधिप्राप्ति प्रणाली से संबंधित प्रेषित जानकारी के संग्रह तथा विश्लेषण के लिए केन्द्रीय डेटाबेस बनाने हेतु पीएमयू को उचित कंप्यूटर हार्डवेयर और विषय संबंधित सॉफ्टवेयर के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।

पीएमयू आधारभूत, मध्यावधि और परियोजना समापन के सर्वेक्षण तथा अन्य विशेष सर्वेक्षण/अध्ययन जो परियोजना कार्यान्वयन के दौरान आवश्यक हो के लिए बाहरी एजेंसियों की सेवाएं लेगा। उभरती जरुरतों पर आधारित संभावित नवाचारों के साथ प्रयोग करने के लिए कुछ प्रायोगिक अध्ययन करना भी आवश्यक हो सकते हैं।

घरेलू/विदेशी प्रभावन/अध्ययन यात्रा तथा विभिन्न गतिविधियों के कार्यान्वयन में शामिल कर्मियों के प्रशिक्षण के अनुभवों को सीखने तथा प्रलेखन की सुविधा/परियोजना के विभिन्न घटकों/गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए विशेषज्ञ/तकनीकी सलाह प्रदान करने के लिए देश और विदेश दोनों से सलाहकारों/विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी।