बाह्य निगरानी और मूल्यांकन

बाह्य निगरानी और मूल्यांकन


परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) परियोजना के लिए अभिकल्पित कार्यान्वयन व्यवस्था के अनुसार परियोजना के कार्यान्वयन की निगरानी और निरीक्षण करेगा।

परियोजना कार्यान्वयन योजना (पीआईपी) में आंतरिक निगरानी और मूल्यांकन के अलावा बाह्य संस्थाओं  द्वारा एनडीपी-I की बाह्य निगरानी और मूल्यांकन की परिकल्पना की गई है। एनडीपी-I की बाहरी निगरानी और मूल्यांकन के लिए पीएमयू द्वारा नई दिल्ली की डेवलपमेंट एंड रिसर्च सर्विसिस(डी आर एस) प्रा.लि. की सेवाएं ली जा रही हैं।

परामर्श कार्य का मुख्य उद्देश्य विभिन्न परिणाम संकेतों पर आंकडा इकट्ठा करने के लिए व्यापक और वार्षिक सर्वेक्षण तथा परियोजना निगरानी और मूल्यांकन के लिए डेटाबेस तैयार करना है।

व्यापक सर्वेक्षणों में शामिल हैं i) परियोजना के प्रारम्भ पूर्व आधारभूत सर्वेक्षण ii) तीसरे साल में मध्यावधि सर्वेक्षण iii) छठे साल में परियोजना समापन का सर्वेक्षण।परियोजना के 1, 2, 4 और 5वें साल में वार्षिक सर्वेक्षण किए जायेंगे। व्यापक सर्वेक्षणों-आधारभूत, मध्यावधि और परियोजना समापन  में बड़े आकार के नमूने होंगें जबकि वार्षिक सर्वेक्षण विस्तृत सर्वेक्षणों के एक उप -नमूने पर किये जायेंगे।

सर्वेक्षणों के माध्यम से एकत्रित किया गया आंकड़ा निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जायेगाः

  • योजना और परियोजना प्रारूप के लिए आधारभूत आंकड़ा उत्पन्न करना।
  • सर्वेक्षण के आधार पर परियोजना के कार्यान्वयन के लिए विकसित की गई कार्रवाई योजना का पालन करके निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार।
  • महत्वपूर्ण संकेतकों को पहचान कर, उन्हें मापने के तरीकों और संकेतकों पर आधारभूत आंकड़े देने के लिए जिससे कि नियमित अंतराल और परियोजना के अंत में परियोजना के प्रभाव का सक्षम आंकलन किया जा सके।
  • परियोजना हस्तक्षेपों से उत्पन्न किसी भी संभावित प्रतिकूल प्रभावों सहित सामाजिक और पर्यावरणीय निष्पादित परिणाम का आंकलन ।

परामर्शदाता के मुख्य कार्यः-

चयनित सलाहकार पीएमयू के सहयोग से निम्नलिखित गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होगाः-​

अ)     सर्वेक्षणों के लिए नमूना ढांचा तथा नमूना पद्धति विकसित करना। इसमें निम्नलिखित कार्य शामिल होंगे।

  • नमूना चयन के लिए एक पद्धति की सिफारिश, नमूने के ढांचे का विकास तथा नमूने का चयन। भाग लेने वाले प्रत्येक राज्य में तथा परियोजना क्षेत्र के अन्य वर्गीकरण में संकेतकों में अत्यंत लघु परिवर्तन का पता लगे इस प्रकार से नमूना प्रारूप में पर्याप्त नमूना आकार सुनिश्चित करना चाहिए। अंतिम नमूना और नमूना चयन करने के लिए प्रयोग की जानेवाली सांख्यिकी पद्धति का विवरण को पीएमयू की स्वीकृति प्रदान होनी चाहिए।
  • नमूना प्रारूप और नमूना आकार का निर्धारण पीडीओ संकेतकों और अन्य प्रभावित करने वाले तत्वों (डेरी पशुओं की संख्या मालिकी, दुग्ध उत्पादन और बाजारों में बिक्री इत्यादि पर आंकडे सहित) के अच्छे माध्यमिक आंकडे पर निर्भर होना चाहिए।
  • चयनित संस्था, नमूने का भार विकसित करेगी तथा भार विकसित करने के लिए प्रयुक्त पद्धति पर प्रलेखन प्रदान करेगी।

ब)     क्षेत्र सर्वेक्षण के मार्गदर्शन के लिए सर्वेक्षण प्रश्नावली और अन्य दस्तावेज विकसित करने के लिए

  • सलाहकार मसौदा प्रश्नावली के पुनरीक्षण और अनुवाद के लिए जिम्मेदार होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सभी संकेतकों पर आंकडा एकत्र करने के लिए पर्याप्त है जिसमें i) पीडीओ के संकेतक ii) मध्यावधि परिणाम संकेतक iii) और भारत में डेरी उत्पादन की विशिष्टता पर संकेतक शामिल हों।
  • प्रश्नावली का पुनरीक्षण पीएमयू के साथ परामर्श कर किया जायेगा और प्रश्नावली के अंतिम रूप पर पीएमयू की सहमति होनी चाहिए।
  • कोडिंग संदर्शिका, साक्षात्कारकर्ता और पर्यवेक्षक नियम पुस्तिका और आंकड़ा प्रविष्टि पुस्तिका सहित सभी सहायक प्रलेख तैयार करने की  जिम्मेदारी सलाहकार की होगी। सभी दस्तावेज की हार्ड प्रतियां (कागज़ पर) और इलेक्ट्रानिक संस्करण पीएमयू को उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • प्रश्नावली के प्रायोगिक परीक्षण, सर्वेक्षण लागू करने, क्षेत्र का आंकड़ा संग्रह और पर्यवेक्षण आंकड़ा प्रविष्टि और आंकड़े की सफाई की  जिम्मेदारी भी सलाहकार की होगी । प्रत्येक सर्वेक्षण शुरू होने से पहले इन सर्वेक्षण प्रक्रियाओं की व्यवस्थाओं पर पीएमयू के साथ चर्चा कर सहमति बनाई जाएगी।
  • आंकड़ा संग्रह के दौरान प्रत्येक परिवार का भौतिक स्थान जीपीएस (भौगोलिक पोजिशनिंग सिस्टम) उपकरण का उपयोग कर निश्चित किया जाएगा ।स)     पर्यावरण और सामाजिक प्रबंधन प्रारूप के अनुपालन का आंकलन करने के लिए। यह आंकलन परियोजना सर्वेक्षण के मध्यावधि और समापन दौर में  किया जाएगा।

ड)     परियोजना के लिए विकसित शासन और जवाबदेही कार्य योजना (जीएएपी) प्रारूप के अनुपालन का आकलन। यह आंकलन परियोजना सर्वेक्षण के मध्यावधि और समापन दौर में  किया जाएगा।

ई)     क्षमता निर्माणः चूंकि नियत कार्य में लंबी अवधि की भागीदारी की आवश्यकता है, यह अनिवार्य है कि सलाहकार इस कार्य के लिए समर्पित पेशेवर निर्धारित करे जो ज्ञान बांटने और उनकी क्षमता निर्माण की दृष्टि से  पीएमयू के साथ मिलकर कार्य करें।

सलाहकारी संस्था का उत्पाद

  • प्रारंभ रिपोर्टः रिपोर्ट सर्वेक्षण की पद्धति, आंकड़ा एकत्र करने के साधन जैसे प्रारूप और प्रश्नावली सर्वेक्षण के लिए दिशा-निर्देश, नमूना स्थानों की सूची और आंकड़ा संग्रह की प्रक्रियाओं का वर्णन करेगी।
  • अंतरिम रिपोर्टः इस रिपोर्ट में निम्नलिखित का वर्णन होगाः सर्वेक्षण पद्धति के मुद्दे, आंकड़ा संग्रह और अन्य सर्वेक्षण प्रक्रियाओं (जैसे आंकड़ा प्रविष्टि) में हासिल की गई प्रगति, समस्याओं का सामना और उनका निपटारा ।
  • इलेक्ट्रानिक सर्वेक्षण आंकड़ाः एक बार आंकड़ा संग्रह, आंकड़ा प्रविष्टि और आंकड़े की सफाई का कार्य पूर्ण हो जाए तब सलाहकार एसपीएसएस/ एसटीएटीए/ एसएएस प्रारूप में और उचित आंकड़ा शब्दकोष के साथ मान्य आंकड़ा उपलब्ध कराएगा।
  • मसौदा रिपोर्टः रिपोर्ट में आंकड़ा विश्लेषण के परिणाम के साथ सभी संकेतकों पर निर्धारित किए अनुसार आंकड़ा सारांश भी शामिल होंगे। रिपोर्ट स्पष्ट, तार्किक और पाठनीय तरीके से विकसित की जाएगी।
  • अंतिम रिपोर्टः मसौदा अंतिम रिपोर्ट में मसौदा रिपोर्ट पर किए गए सभी टिप्पणियों को सम्मिलित किया जाएगा।

डेवलपमेंट एंड रिसर्च सर्विसिस प्रा. लि., नई दिल्ली के अलावा पीएमयू द्वारा परियोजना संबंधित संकेतकों की निगरानी और मूल्यांकन के लिए कुछ विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा विशेष अध्ययन , जैसे कि मीथेन उत्सर्जन में ह्यास का अध्ययन, अपव्यय प्रबंधन का अध्ययन इत्यादि करने के लिए सेवाएं ली जायेंगी।

सलाहकारी संस्था के उत्पाद की समीक्षा

प्रारंभ रिपोर्ट , मसौदा रिपोर्ट और अंतिम रिपोर्ट की पीएमयू और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट किसी अन्य समीक्षा प्रक्रिया के भी अधीन होगी जो कि एनडीपी-I के लिए स्थापित की गई हो।