एनडीडीबी हिमाचल प्रदेश में दूध उत्‍पादन को बढ़ावा देगी

 

एनडीडीबी हिमाचल प्रदेश में दूध उत्‍पादन को बढ़ावा देगी

 

शिमला, 8 जून 2018: हिमाचल प्रदेश में डेरी व्‍यवसाय एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से एनडीडीबी ने 8 जून 2018 को शिमला में हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्‍यमंत्री      श्री जय राम ठाकुर के साथ व्‍यापक विचार-विमर्श किया । माननीय मुख्‍यमंत्री ने दूध उत्‍पादकों के हित में डेरी विकास हेतु तत्‍काल उपाय करने इच्‍छा व्‍यक्‍त की । उन्‍होंने यह कहा कि डेरी विकास का संबंध न केवल दूध कहे जाने वाली पण्‍यवस्‍तु है, बल्कि यह हिमाचल के ग्रामीण परिवारों में सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाने से संबंधित है ।

श्री रथ ने कहा कि एनडीडीबी राज्‍य की डेरी संस्‍थाओं को सहायता उपलब्ध कराएगी ताकि वे अपने सदस्‍यों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा सकें और उन उत्‍पादक संस्‍थाओं को बढ़ावा देगी जो सहकारी मूल्‍यों के प्रति ईमानदार बनी रहती हैं ।

डेरी पशुओं के दूध में एसएनएफ प्रतिशतता में कमी की समस्‍या का समाधान करने के लिए एनडीडीबी ने थन के स्‍तर पर दूध में एसएनएफ %  के आंकलन तथा दूध के एसएनएफ % स्‍तर पर संतुलित आहार खिलाने के प्रभाव का एक अध्‍ययन आयोजित किया था । इस अध्‍ययन में जैविक मापदंड़ों के साथ दूध की अन्‍य मात्रा एवं गुणवत्‍ता का अध्‍ययन करना भी शामिल था । इसका ध्यान मुख्‍य रूप से लाभ में वृद्धि करने तथा दुधारू पशुओं को संतुलित आहार खिलाने के बारे में किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने पर केंद्रित था ।

अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने बताया कि डेरी बोर्ड उपलब्‍ध आहार संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर उसमें मूल्‍य वृद्धि को बढ़ावा देने हेतु हिमाचल प्रदेश में आहार संतुलन कार्यक्रम की शुरूआत करना चाहता है । उन्‍होंने कहा कि डेरी पशुओं को संतुलित आहार खिलाने से दूध के उत्‍पादन वृद्धि पर महत्‍वपूर्ण प्रभाव पड़ा है ।

हिमाचल प्रदेश में गाय की अवर्णित नस्‍लों को उन्‍नत बनाने के लिए देशी नस्‍लों जैसे कि साहीवाल एवं रेड सिंधी के गुणवत्‍तापूर्ण हिमिकृत वीर्य डोजों को उपलब्ध कराकर एनडीडीबी राज्‍य सरकार को सहायता प्रदान करेगी । एनडीडीबी राज्‍य के चिह्नित इलाकों में जर्सी गाय के लिए एक संतति परीक्षण परियोजना को लागू कर सकती है जिससे कि उच्‍च आनुवंशिक गुण के जर्सी सांड़ों का उत्‍पादन हो सके ताकि देश भर के वीर्य स्‍टेशनों में जर्सी सांड़ों की आवश्‍यकता की पूर्ति की जा सके ।

पशुपालन विभाग का पालमपुर वीर्य केंद्र सघन आवासीय/व्‍यावसायिक क्षेत्र में स्थित है और यहां इसके विस्‍तार तथा जैव-सुरक्षा को मजबूत बनाने की कोई संभावना नहीं है जो कि बहुत महत्‍वपर्ण है । एनडीडीबी इस पालमपुर वीर्य केंद्र को ऐसे उपयुक्‍त स्‍थान पर स्‍थानांतरित करने की संस्‍तुति करती है, जहां जैव सुरक्षा संभव है । एनडीडीबी अदुवाल वीर्य केंद्र को श्रेणीकृत करने की भी संस्‍तुति करती है । एनडीडीबी संपूर्ण जैव सुरक्षा मानकों सहित वीर्य केंद्रों को स्‍थानांतरित करने में सभी तकनीकी एवं प्रबंधकीय सहायता उपलब्ध कराएगी ।

वर्तमान में, हिमाचल दुग्‍ध महासंघ के पास 640 क्रियाशील डीसीएस हैं जिनकी कुल सदस्‍यता 38,500 है इसमें 35%  से अधिक महिलाएं हैं । वर्ष 2017-18 के दौरान इस महासंघ ने लगभग 63 हजार किग्रा प्रतिदिन (बिक्री योग्‍य अधिशेष का 7%) दूध का संकलन किया । डीसीएस स्‍तर पर दूध उत्‍पादकों से गुणवत्‍ता जांच पर आधारित कच्‍चा दूध संकलित किया जा रहा है और उस दूध को या तो पास के प्रसंस्‍करण संयंत्र को या फिर महासंघ के स्‍वामित्‍व वाले चिलिंग केंद्र (सीसी)/ बल्‍क मिल्‍क कूलरों को भेजा जा रहा है । इसके लिए, डीसीएस की सुविधा वाले गांवों में 120 किलोलीटर की संयुक्‍त क्षमता के 107 बल्‍क मिल्‍क कूलर स्‍थापित किए गए हैं । इसके अलावा, इस महासंघ के पास 82 हजार लीटर प्रतिदिन की संयुक्‍त क्षमता वाले 24 चिलिंग केंद्र हैं । इस महासंघ में 15 दिन का दूध बिलिंग साइकिल लागू है ।

इस महासंघ के स्‍वामित्‍व में 65 हजार लीटर प्रतिदिन की संयुक्‍त क्षमता के 3 प्रसंस्‍करण संयंत्र  उपलब्‍ध हैं । मंडी एवं धर्मशाला संयंत्रों के अतिरिक्‍त दूध को प्रसंस्‍करण हेतु शिमला संयंत्र को  भेजा जाता है और वही दूध पंजाब में निजी डेरी संयंत्रों को कनवर्जन हेतु भेजा जाता है । महासंघ मुख्‍य रूप से शिमला, कांगड़ा और सिरमोर जैसे बड़े शहरों में दूध की बिक्री करता है । चंड़ीगढ़ और पंचकुला में भी इसकी उपलब्धता सीमित है । वर्ष 2017-18 में महासंघ ने लगभग 25 हजार किग्रा प्रतिदिन तरल दूध की बिक्री की ।

2016-17 के दौरान, महासंघ का रू. 109.92 करोड़ का कारोबार रहा । इससे कुल रू. 2.47 करोड़ का लाभ हुआ ।