एनडीडीबी की विभिन्न विकास पहल पश्चिम बंगाल की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देगी: दिलीप रथ

एनडीडीबी की विभिन्न विकास पहल पश्चिम बंगाल की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देगी: दिलीप रथ

कोलकाता, 27 जुलाई 2018: श्री पारस दत्‍ता, अध्‍यक्ष, पश्चिम बंगाल सहकारी दूध उत्‍पादक महासंघ तथा श्री अनिल वर्मा, प्रधान सचिव, पशु संसाधन विकास, पश्चिम बंगाल सरकार की उपस्थिति में श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने चौरंगी महिला डेरी सहकारी समिति (बासंती, साउथ 24 परगना जिला) के आदर्श डीसीएस भवन की आधारशिला रखी । चौरंगी महिला डीसीएस के महिला दूध उत्‍पादकों का अब यह मानना है कि डेरी महिलाओं की आजादी का न केवल एक साधन है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ावा देने में सहायक है । इस कार्यक्रम में श्री रथ ने कहा कि पश्चिम बंगाल को परम्‍परागत कृषि के अलावा बड़े पैमाने पर पशुपालन और सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्‍यकता है ।

एक आदर्श डेरी सहकारी समिति बनाने के लिए एनडीडीबी की इस डीसीएस को अपनाने की योजना है। यह डीसीएस सुंदरबन सहकारी दूध एवं पशुधन उत्‍पादक संघ लि. से संबद्ध है । वर्तमान में, 61 दूध प्रदाता लगभग 104 लीटर इस समिति को दूध देते हैं । दूध के अतिरिक्‍त, चौरंगी डीसीएस में सोना मूंग दाल, दूधेश्‍वर चावल, गोविंदोभोग चावल, देशी मुर्गी एवं बत्‍तख के अंडे प्राप्‍त किए जा रहे हैं ।

सहकारी व्‍यवसाय के सुदृढ़ीकरण में डिजिटल पहल की भूमिका को ध्‍यान में रखते हुए, एनडीडीबी ने डेरी सहकारिताओं के लिए एकीकृत स्‍वचालित दूध संकलन प्रणाली (एएमसीएस) सॉफ्टवेयर का विकास किया है । पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर एनडीडीबी ने सुंदरबन सहकारी दूध एवं पशुधन उत्‍पादक संघ लि. से संबद्ध डीसीएस में एएमसीएस सॉफ्टवेयर स्‍थापित किया है । इस सॉफ्टवेयर के शुभारंभ के दौरान, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि इस सॉफ्टवेयर से संचालनों में पारदर्शिता आने के अलावा इससे प्रक्रियात्‍मक दक्षता में सुधार होगा और यह डेरी सहकारिताओं को रियल टाइम सूचना उपलब्‍ध कराएगा । एएमसीएस दूध के बिल का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजता है । किसानों को प्रत्‍येक ट्रांजेक्‍शन के लिए एसएमएस प्राप्‍त होते हैं और इस एंड्रायड एप्लिकेशन में सभी पिछले ट्रांजेक्‍शन प्राप्‍त किए जा सकते हैं ।

उन्‍होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍व-रोजगार के नए अवसरों का सृजन करने के लिए डेरी सहकारिताओं को आगे आना चाहिए । एनडीडीबी इस प्रकार की गतिविधियों के आयोजन की दिशा में निरंतर प्रयासरत रही है । ये गतिविधियां डेरी आधारित, कृषि आधारित अथवा इनसे संबंद्ध हो सकती हैं, जिनके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधन आसानी से उपलब्ध होते हैं ।

एनडीडीबी के विशेषज्ञों ने एथनो वेटनरी मेडिसीन की तकनीकों के बारे में बताया। अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने चौरंगी महिला डेरी सहकारी समिति (बासंती, साउथ 24 परगना जिला) का निरीक्षण किया।

सुंदरबन सहकारी दूध एवं पशुधन उत्‍पादक संघ लि.

1997 में अपनी शुरूआत से, सुंदरबन सहकारी दूध एवं पशुधन उत्‍पादक संघ लि. प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों में भी मौसम के अनुसार वर्ष में लगभग 4-6 महीने तक कार्यरत रहा । डेरी बुनियादी ढांचे की कमी के कारण दूध संघ को मजबूरन 2014 में संचालनों को बंद करना पड़ा था । नवंबर 2015 में, एनडीडीबी के मागदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से सुंदरबन सहकारी दूध एवं पशुधन उत्‍पादक संघ लि. ने अपनी पुनरुद्धार योजना की शुरुआत की ।

दूध संघ ने सुंदरबन में डेरी/पशुधन एवं कृषि कार्य में प्रवृत्‍त छोटे एवं सीमांत महिला किसानों को सशक्‍त बनाने के मिशन की शुरूआत की थी । बिचौलियों द्वारा किए जाने वाले शोषण को समाप्‍त करने तथा तत्‍काल बिक्री को बंद करने के लिए किसानों से प्राप्‍त होने वाले प्राय: सभी कृषि उत्‍पाद जैसे दूध, देशी बत्‍तख और मुर्गी के अंडे, देशी चावल, दालें, जंगली शहद की खरीदी शुरू की गई है । यह संघ देश का पहला जैविक दूध एवं पशुधन संघ बना । उपभोक्‍ताओं को गुणवत्‍तायुक्‍त एवं स्‍वास्‍थ्‍यकर आहार उपलब्‍ध कराने पर जोर दिया गया था।

वर्तमान में, सुंदरबन दूध संघ को आमतौर पर सुंदरिनी (पश्चिम बंगाल का दक्षिण 24 परगना जिला) के नाम से जाना जाता है । यहां 70 महिला डीसीएस कार्यरत हैं । इसमें महिला किसान 7 ब्‍लॉकों से प्रतिदिन 4000 किग्रा से अधिक दूध संकलन करती हैं । इस सुंदरबन दूध संघ की प्रमुख विशेषता यह है कि डीसीएस सदस्‍य बनाने के लिए यहां दूध उत्‍पादक को ‘अपने किसान को जाने’ (केवाईएफ) सूचना (बैंक खाता एवं पहचान पत्र सहित) प्रस्तुत करनी पड़ती है । डीसीएस स्‍तर पर प्रत्‍येक दूध सैंपल का किसानों की उपस्थिति में परीक्षण किया जाता है और उसकी पावती रसीद दी जाती है ।  10 दिनों के अंतराल पर व्‍यक्तिगत बैंक खाते में एनईएफटी के जरिए 100% भुगतान किया जाता है। सुंदरिनी अपने किसानों को उचित मूल्य का भुगतान करती है जिसका न्‍यूनतम 75% उन्‍हें वापस मिलता है। अब, एनडीपी-। (एनडीडीबी), एनपीडीडी (भारत सरकार), मिलेनियम एलायंस (एफआईसीसीआई) के अंतर्गत सुंदरिनी का क्रियान्‍वयन किया जा रहा है ।

दूध संघ ने जैविक खेती एवं सतत पशुधन पालन पर किसानों के लिए जागरूकता तथा कौशल विकास हेतु व्‍यापक अभियान की शुरूआत की है । इसने सुंदरिनी के सभी उत्‍पादों के लिए जैविक प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने की प्रक्रिया शुरू की है । बिना किसी रासायनिक कीटनाशक अथवा खाद का इस्‍तेमाल किए 100% हरे चारे, एजोला पर आधारित दूध; अंडे के उत्‍पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को एथनो-वेटनरी मेडिसीन का इस्‍तेमाल करने तथा हर्बल बगीचा बनाने का सुझाव

दिया जा रहा है । इस संघ ने किसानों के लिए 100% एसएस दूध के कनस्‍तर/दूध की बाल्‍टी की खरीदी करने तथा केवल शीशे की बोतल में गाय के घी एवं शहद की बिक्री करने पर जोर दिया ।

2017-18 के दौरान, सुंदरिनी ने 7 टन शहद की बिक्री की और अगले वर्ष 15 टन के बिक्री का लक्ष्‍य है । सुंदरबन के जैविक सदाबहार वन का शहद सहकारी पद्धति पर संकलित किया जाता है ।

पश्चिम बंगाल में डेरी उद्योग

उत्पादन मूल्य की दृष्टि से दूध भारत की एकल सबसे बड़ी कृषि पण्‍यवस्‍तु है । एनडीडीबी डेरी उद्योग को भारत के ग्रामीण जनजीवन विकास के साधन के रूप में बदलने के लिए कई पहल कर रही है । आज लगभग 1.7 लाख डेरी सहकारी समितियों/उत्‍पादक कंपनियों से जुड़े 1.70 करोड़ से अधिक दूध उत्‍पादक देश के इस डेरी सहकारी अभियान से लाभान्वित हो रहे हैं । पश्चिम बंगाल एनडीडीबी द्वारा कार्यान्वित इन योजनाओं में हमेशा से सक्रिय भागीदार रहा है ।

वर्तमान में, मिलकर 14 क्रियाशील दूध संघ 2,58,000 दूध उत्‍पादकों से प्रतिदिन लगभग 188 हजार किग्रा दूध का संकलन करते हैं जिनमें 4,000 से अधिक डेरी सहकारी समितियां शामिल हैं । पिछले 10 वर्षों में राज्‍य का दूध उत्पादन देश के 4.9% की तुलना में लगभग 2.7% तक बढ़ा है । मार्च 2018 के अनुसार, पश्चिम बंगाल के सहकारी बुनियादी ढांचे में 164 बीएमसी, 12 चिलिंग केंद्र और 11 डेरी संयंत्र उपलब्‍ध हैं ।

एनडीडीबी की राष्‍ट्रीय डेरी योजना-। (एनडीपी-।) के अंतर्गत, 10 अंतिम कार्यान्‍वयन एजेंसियों (ईआईए) की 26 उप परियोजनाएं अनुदान सहायता राशि रू. 43.25 करोड़ के साथ कार्यान्‍यवन के अधीन हैं । ये ईआईए हैं:- भागीरथी दूध संघ, पश्चिम बंगा गो-संपद विकास संस्‍था, इच्‍छामती दूध संघ,किसान दूध संघ, कांगसोबती दूध संघ, हावड़ा दूध संघ, मिदनापुर दूध संघ, सुंदरबन दूध संघ, कुल्लिक दूध संघ और मनभूम दूध संघ ।

पश्चिम बंगाल में एनडीपी-I के अंतर्गत कार्यान्वित गतिविधियों में शामिल हैं – 48.1 लाख उच्‍च गुणवत्‍ता के रोगमुक्‍त वीर्य डोजों के उत्‍पादन हेतु हरिनघाटा और सल्‍बोनी वीर्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण; आयातित भ्रूणों के माध्‍यम से सांड़ उत्‍पादन; आहार संतुलन उप परियोजनाएं जिनके अंतर्गत स्‍थानीय तौर पर उपलब्‍ध संसाधनों का इस्‍तेमाल करके कम कीमत पर 35,000 दुधारू पशुओं को स्‍थानीय जानकारी व्‍यक्तियों (एलआरपी) के जरिए संतुलित आहार उपलब्‍ध कराया जाएगा इसमें 500 गांव शामिल होंगे; चारा विकास उप परियोजनाओं के अंतर्गत, साइलेज निर्माण इकाइयों का निर्माण किया जाएगा; ग्राम आधारित दूध संकलन प्रणाली (वीबीएमपीएस) उप परियोजनाओं के तहत 2738 गांवों में दूध उत्‍पादकों को स्‍वच्‍छ एवं पारदर्शी दूध संकलन प्रणाली उपलब्‍ध कराई जाएगी, इनमें से 1,256 नए गांव तथा 53,888 दूध उत्‍पादक सदस्‍य के रूप में नामांकित किए जाएंगे ।