माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने डेरी द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर एनडीडीबी की राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया

माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने डेरी द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर एनडीडीबी की राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया

आणंद, 10 सितंबर 2018: श्री राधा मोहन सिंह, माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री, भारत सरकार ने एनडीडीबी के टी के पटेल सभागर, आणंद में एनडीडीबी द्वारा आयोजित डेरी के माध्‍यम से किसानों की आय दोगुनी करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया ।

 श्री परषोत्‍तम रूपाला, माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण तथा पंचायती राज राज्‍य मंत्री, भारत सरकार; श्री ईश्‍वरसिंह ठाकोरभाई पटेल, माननीय सहकारिता, खेल युवा और सांस्‍कृतिक गतिविधियां (स्‍वतंत्र प्रभार), परिवहन राज्य मंत्री, गुजरात सरकार; श्री लालसिंह वडोदिया, माननीय सांसद राज्य सभा;    श्री दिलीपभाई पटेल, माननीय सांसद, लोक सभा तथा श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई ।

 देश के 16 राज्‍यों के दूध संघों एवं उत्‍पादक कंपनियों के 600 से अधिक प्रगतिशील डेरी किसान इस कार्यक्रम में उपस्थित हुए । किसानों की आय बढ़ाने के लिए डेरी फार्म प्रबंधन, पशु स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा संबंधी रोकथाम एवं उपचार, पशु प्रजनन में प्रौद्योगिकीय विकास, सहकारिताओं के संचालन में प्रौद्योगिकी की भूमिका, कुशल खाद प्रबंधन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर विशेषज्ञों द्वारा अभिमुखन सत्र के अलावा, डेरी किसानों को व्‍यावहारिक जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिए प्रदर्शनी के माध्‍यम से विभिन्‍न प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने की व्‍यवस्‍था भी की गई । कुछ महिला किसानों ने बायो गैस प्रौद्योगिकी तथा दूध संकलन में प्रयुक्त सूचना प्रौद्योगिकी, पशु पोषण एवं पशु प्रजनन के बारे में अपने अनुभव साझा किए ।

 श्री राधा मोहन सिंह ने पशु आहार के लिए एनडीडीबी के गुणवत्‍ता चिह्न लोगो का अनावरण किया । पशु आहार/ खनिज मिश्रण पर “गुणवत्‍ता चिह्न”  अंकित होने पर यह पता चलता है कि विनिर्माता ने मानक प्रचालन प्रक्रियाओं को अपना कर उन्हें क्रियान्वित किया है । निर्धारित मात्रा में खनिज पदार्थों एवं विटामिन से युक्‍त गुणवत्‍तापरक आहार खिलाने से डेरी पशुओं की प्रजनन क्षमता में सुधार होता है । गुणवत्‍ता चिह्न अंकित पशु आहार खिलाने के लाभों को बताने वाले एनडीडीबी के गुणवत्‍ता चिह्न लोगो पर बना एक टीवी विज्ञापन का भी उन्‍होंने लोकार्पण किया । श्री परषोतम रूपाला ने दूध एवं दूध उत्‍पादों के उपयोग को प्रोत्‍साहित करने के लिए एनडीडीबी द्वारा बनाया गया अन्य टीवी विज्ञापन पियो दूध का लोकार्पण किया । एनडीडीबी इनकी बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए डेरी उत्पादों के व्‍यावसायिक उत्‍पादन हेतु उत्‍पाद, प्रक्रिया एवं पैकेजिंग प्रौद्योगिकियां उपलब्‍ध कराकर उत्‍पादों में विविधता लाने में डेरी सहकारिताओं को सहयोग प्रदान करती है और इसके जरिए किसानों की आय में वृद्धि होती है। इसी क्रम में उन्होंने एनडीडीबी के उत्‍पाद एवं प्रक्रिया प्रौद्योगिकियां ब्रोशर का भी विमोचन किया ।

 कार्यक्रम के दौरान, नेशनल कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनसीडीएफआई) के ई-मार्केट प्‍लेटफार्म का कुशलता पूर्वक उपयोग करके डेरी किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने वाली डेरी सहकारिताओं को भी केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा पुरस्‍कृत किया गया ।

 किसानों को संबोधित करते हुए श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि किसानों की दीर्घकालिक आजीविका के तौर पर डेरी के विकास में प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका रही है। किसानों की आय दोगुनी करने के भारत सरकार के लक्ष्‍य के अनुरूप, एनडीडीबी डेरी किसानों की प्रौद्योगिकी से संचालित आय प्राप्ति की गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है । आय प्राप्ति के विभिन्न साधनों पर केंद्रित विविध वैकल्पिक (कृषि एवं संबद्ध) गतिविधियों के जरिए डेरी किसानों को प्रेरित-प्रोत्‍साहित कर उनमें प्रवृत्त करना उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं कल्याण के लिए आवश्‍यक है ।

 केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में समान रूप से वृद्धि हासिल करने के लिए डेरी ग्रामीण भारत की बहुत महत्‍वपूर्ण विकासत्‍मक गतिविधि है । किसानों की आय दोगुनी करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए, भारत सरकार ने इसे हासिल करने के लिए सात-सूत्रीय रणनीति का लोकार्पण किया है जिनमें शामिल हैं –  i) उत्‍पादकता वृद्धि ii) सामग्रियों (इनपुट्स) का उचित इस्तेमाल iii) कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना iv) मूल्य वर्धन v) विपणन में सुधार vi) जोखिम को कम करना vii) सहायक गतिविधियों जैसे कि डेरी, मधुमक्‍खी पालन इत्‍यादि को बढ़ावा देना । डेरी बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्‍न कार्यक्रमों जैसे कि राष्‍ट्रीय डेरी योजना चरण-। (एनडीपी-।) और डेरी प्रसंस्‍करण एवं बुनियादी ढांचा विकास निधि (डीआईडीएफ) के जरिए पहले से ही विभिन्न समस्‍याओं का समाधान किया जा रहा है ।

 श्री रूपाला ने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए नए प्रयोग जमीनी स्‍तर पर किसानों के बीच पहुंचने चाहिए । चूं‍कि हमारी अधिकांश ग्रामीण आबादी युवा है, इसलिए हमें डेरी उद्योग एवं पशुपालन प्रौद्योगिकी से संचालित कुशल आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों को प्रचारित-प्रसारित करने की आवश्यकता है। हमारे डेरी क्षेत्र के कुछ ऐसे पहलू हैं जिन पर विशेष ध्‍यान देने की जरूरत है जिनमें प्रजनन के क्षेत्र में हुए नए प्रयोगों के जरिए पशु उत्‍पादकता में सुधार लाना, पोषण एवं पशु स्‍वास्‍थ्‍य तथा दूध उत्‍पादकों को बाजार की पहुंच उपलब्‍ध कराना शामिल हैं ।

 गुजरात के माननीय मंत्रियों ने डेरी सहकारिताओं में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर अपने बहुमूल्‍य विचार व्यक्त किए । उन्‍होंने डेरी सहकारिताओं को ग्रामीण क्षेत्रों में नए अवसरों का सृजन करने का सुझाव दिया ।

 अपने संबोधन में अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने डेरी किसानों को अतिरिक्‍त आय उपलब्‍ध कराने पर केंद्रित एनडीडीबी की नई प्रौद्योगिकी संचालित विभिन्‍न पहल के बारे में बताया । उन्‍होंने कहा कि एनडीडीबी ने देशी गाय की नस्‍लों के जिनोमिक चयन के लिए इंडसचिप (INDUSCHIP) नामक एक जिनोटाइपिंग चिप विकसित किया है । इन-विट्रो भ्रूण उत्‍पादन तकनीक के माध्‍यम से देशी नस्‍लों का सुधार भी किया जा सकता है । खाद प्रबंधन को आय एक अतिरिक्‍त स्रोत बनाने के लिए एनडीडीबी डेरी किसानों द्वारा फ्लेक्‍सी बायो गैस संयंत्रों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। सोलर पम्‍प इरिगेटर्स कोआपरेटिव इंटरप्राइज अर्थात SPICE का निर्माण एनडीडीबी की अन्‍य महत्‍वपूर्ण पहल है जिसके जरिए सोलर पम्‍प अपनाने वाले किसान उत्पन्न अतिरिक्‍त बिजली की बिक्री कर सकेंगे । इसके अलावा, उन्‍होंने यह बताया कि ग्राम स्‍तरीय डेरी सहकारी समितियों द्वारा साइलेज का उत्‍पादन और व्‍यावसायिक तौर पर उनकी बिक्री अन्‍य पहल है जिसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चुका है । हरे चारे एवं फसल अवशेषों के भंडारण के लिए इस साइलेज प्रौद्योगिकी में अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं । यदि इसे कम लागत वाले चॉपर्स, मोवर्स, बैगर, बेलर और रैपर्स का इस्‍तेमाल करके 25-50 किलो की बोरियों में पैक किया जाए तो गांव एवं मिल्‍क शेड में इसको आसानी से बेचा जा सकता है ।

 श्री रथ ने यह बताया कि एथनो वेटनरी मेडिसीन तकनीकों को लोकप्रिय बनाकर दूध उत्‍पादक पशु उपचार खर्च में काफी बचत कर सकते हैं जो कि किसानों की आय का एक अप्रत्‍यक्ष स्रोत बन सकता है। एनडीडीबी की स्‍वचालित दूध संकलन प्रणाली (एएमसीएस) साफ्टवेयर में सहकारी व्‍यवसाय को मजबूती प्रदान करने के लिए डिजिटल पहल का उपयोग किया गया है । इस एकीकृत सॉफ्टवेयर से डीसीएस स्‍तर पर संपूर्ण संचालनों में पारदर्शिता आती है और संचालन संबंधी सभी आवश्‍यकताओं की पूर्ति होती है । एएमसीएस से किसानों के दूध बिल का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जाता है ।