पशुधन किसानों की आय बढ़ाने में प्रौद्योगिकी महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करेगी : अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

पशुधन किसानों की आय बढ़ाने में प्रौद्योगिकी महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करेगी:  अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

 आणंद, 23 अक्‍तूबर 2018: राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने 23 अक्‍तूबर 2018 को डॉ. कुरियन ऑडिटोरियम, एनडीडीबी, आणंद में जैव प्रौद्योगिकीय साधनों का प्रयोग करते हुए पशु पालन के माध्‍यम से किसानों की आय बढ़ाने पर एक कार्यशाला का आयोजन किया । इस एक दिवसीय कार्यशाला ने सभी सहभागियों को पशुधन किसानों की आय बढ़ाने के रोड मैप का सृजन करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान को प्राथमिकता देने के लिए विचार विमर्श हेतु एक मंच प्रदान किया ।

 श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी; डॉ. एस आर राव, वरिष्‍ठ सलाहकार, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार; डॉ. एन सी पटेल, उप कुलपति, आणंद कृषि विश्‍वविद्यालय; डॉ. बी पटनायक, निदेशक, डीएफएमडी, आईसीएआर; डॉ. ए के रावत, निदेशक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार; डॉ. नीलेश शर्मा, सह-प्राध्‍यापक, शेर ए कश्‍मीर कृषि विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय, जम्‍मू; डॉ. सी जी जोशी, निदेशक, गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्‍द्र, गांधी नगर; डॉ. अमरीश त्‍यागी, प्रधान वैज्ञानिक तथा प्रमुख, पशु पोषण विभाग, एनडीआरआई, करनाल; डॉ. ए के वर्मा, विभागाध्‍यक्ष, पशु पोषण, आईवीआरआई, बरेली; डॉ. पंकज सुमन, वैज्ञानिक, एनआईएबी, हैदराबाद; श्री संग्राम चौधरी तथा श्री वाई वाई पाटिल, कार्यपालक निदेशक, एनडीडीबी तथा एनडीडीबी के विशेषज्ञों ने इस कार्यशाला में भाग लिया ।

 अपने संबोधन में श्री दिलीप रथ ने कहा ‘’भारत में पशुपालन एक महत्‍वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है और औसतन लगभग 40% ग्रामीण परिवार डेरी उद्योग से जुड़े हैं । हमारे ग्रामीण परिवारों की कुल आय में पशुधन से प्राप्‍त होने वाली आय का 10-12% योगदान है । तेजी से बढ़ती जनसंख्‍या तथा पोषण की बढ़ती हुई मांग के कारण भारत में दूध तथा पशु उत्‍पादों की मांग निरंतर बढ़ रही है । अत: बाजार की मांग को पूरा करने हेतु हमारे किसानों को पशुधन के माध्‍यम से किफायती गुणवत्‍ता पण्‍यवस्‍तुओं को अपनाने का अवसर मिलेगा जो निश्चित रूप से उनकी आय को बढ़ाएगी।

 श्री रथ ने कहा कि केवल पशुओं की संख्‍या में वृद्धि करके गुणवत्‍ता दूध तथा अन्‍य पण्‍य वस्‍तुओं के उत्‍पादन में वृद्धि करना लंबी अवधि में उचित नहीं होगा क्‍योंकि इससे आहार, चारा तथा अन्‍य संसाधनों की उपलब्‍धता पर दबाव बढ़ेगा । अंत: यह अनिवार्य है कि पण्‍य वस्‍तुओं की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए देश को प्रजनन दक्षता में सुधार, व्‍यापक रोग प्रबंधन तथा गोवंशीय पशु आबादी के लिए वैज्ञानिक आहार अमल में ला कर उत्‍पादकता वृद्धि पर ध्‍यान केन्द्रित करना चाहिए । पशु प्रजनन, स्‍वास्‍थ्‍य तथा पोषण में अति आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर जैव प्रौद्योगिकी उत्‍पादकता वृद्धि में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है ।

 अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि पशुपालन में कई वर्षों से जैव प्रौद्योगिकी साधनों का प्रयोग किया जा रहा है विशेषकर क) पशु प्रजनन में कृत्रिम गर्भाधान, चयनित प्रजनन, जिनामेमिक चयन, भ्रूण हस्‍तांतरण इत्‍यादि (ख) पशु स्‍वास्‍थ्‍य में रोग निदान, टीका उत्‍पादन तथा ग) पशु पोषण में पाचन शक्ति में वृद्धि, साइलेज उत्‍पादन इत्‍यादि । लागत, तकनीक की जटिलता, प्रशिक्षित जनशक्ति तथा बुनियादी ढॉंचे की अनुपलब्‍धता के कारण जैव प्रौद्योगिकी साधनों के लाभों का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं किया जा सका । पशु पालन विशेषकर वैज्ञानिक प्रजनन में जैव प्रौद्योगिकी के व्‍यापक प्रयोग हेतु निरंतर प्रयास करने की आवश्‍यकता है । इसमें आर्थिक विशेषताओं को ध्‍यान में रखते हुए थर्मो स्‍टेबल तथा नई पीढ़ी के उपचारात्‍मक टीके, तेजी से रोग निदान के लिए देखभाल परीक्षण बिंदु तथा आहार और चारे की सुपाच्‍यता में वृद्धि करना प्रमुख है ।      

 पशु स्‍वास्‍थ्‍य पर पहले तकनीकी सत्र की विषय वस्‍तु थी आर्थिक महत्‍व के संक्रामक रोगों के नियंत्रण द्वारा गरीबी कम करना  । दूसरे सत्र की विशेषता पशु प्रजनन विषय वस्‍तु थी – पशु प्रजनन के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी क्रांति के माध्‍यम से उत्‍पादकता में वृद्धि करना ।पशु पोषण तथा प्रबंधन पर केन्द्रित तीसरे सत्र की विषय वस्‍तु थी – कुशल पशु पोषण तथा प्रबंधन कार्यक्रम द्वारा उत्‍पादकता वृद्धि हेतु जैव प्रौद्योगिकी एक जादू की छड़ी है । कार्यशाला का समापन पशु पालन में जैव प्रौद्योगिकी के कार्यक्षेत्र का पता लगाने पर पैनल चर्चा के साथ  हुआ ।

 पशु स्‍वास्‍थ्‍य, प्रजनन तथा पोषण में आगामी सहयोग तथा अनुसंधान एवं विकास कार्यों की पहचान की गई जिन्‍हें छोटी धारक फार्म प्रणाली पर लागू किया जा सकता है । कार्य बिंदुओं की अनुशंसा की गई जो अंत में किसानों की आय में वृद्धि करेंगे ।