केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री द्वारा आयुर्वेदिक पशु चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री द्वारा आयुर्वेदिक पशु चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

 

17 दिसंबर 2018, आणंद: श्रीमती कृष्णा राज, माननीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने 17 दिसंबर 2018 को एनडीडीबी के टीके पटेल सभागार, आणंद में आयुर्वेदिक पशु चिकित्सा पर तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। वर्ल्ड आयुर्वेद फाउंडेशन, गुजरात सरकार द्वारा आयोजित और आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समर्थित यह सम्मेलन 8वें विश्व आयुर्वेदिक सम्मेलन का एक हिस्सा है ।

 एनडीडीबी के अध्यक्ष श्री दिलीप रथ; तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सी बालाचंद्रन और ट्रांस-डिसिप्लीनरी  हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. दर्शन शंकर ने इस सम्मेलन की शोभा बढ़ाई।

 मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुएमाननीय केंद्रीय मंत्री श्रीमती कृष्णा राज  ने यह कहा कि पारंपरिक पशु चिकित्सा औषधि (एथनो-वेटरनरी मेडिसिन - ईवीएम) की लागत-प्रभावकारिता किसानों की आमदनी दोगुनी करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। ईवीएम सुदूर क्षेत्रों में डेरी किसानों को तत्काल रोकथाम का विकल्प भी प्रदान करता है। ये नुस्खे किफायती हैं क्योंकि इसे अधिकतर पर किसान के घर में उपलब्ध सामग्री से तैयार किया जाता है।

उन्होंने यह बताया कि आज पशुपालन क्षेत्र को कई चुनौतियों, विशेषकर दूध की बेहतर गुणवत्ता एवं दूध में दवा अवशेष इत्यादि का सामना करना पड़ रहा है, जो उपभोक्‍ताओं के लिए ज्वलंत मुद्दे हैं । इन चुनौतियों से निपटने और बाजार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए डेरी क्षेत्र को शीघ्र तैयार होने की आवश्यकता है । वैकल्पिक उपचार विकल्प जैसे कि ईवीएम दवाओं, विशेषकर एंटीबायोटिकके प्रयोग में कमी लाने के लिए उपयोगी साबित हो सकता है । एंटीबायोटिक के इस्‍तेमाल में कमी लाने से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर)की उत्‍पत्ति को लम्बे समय तक रोकने में मदद मिलेगी, जो कि पूरे विश्व के लिए उभरता हुआ एक प्रमुख जन स्वास्थ्य संकट है ।    

उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा ईवीएम के इन नुस्खों को लोकप्रिय बनाया जा रहा है । इसके कारण वैद्यों द्वारा संहिताबद्ध और आयुर्वेद से सिद्ध ज्ञान की समृद्ध परंपरा पुनर्जीवित हो रही है और यह परंपरा क्षेत्र स्‍तर पर सुरक्षित एवं प्रभावी सिद्ध हुई है ।

श्री दिलीप रथ, अध्यक्ष, एनडीडीबी ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक पशु चिकित्‍सा औषधि (ईवीएम) का उपयोग भारत में कई वर्षों से न केवल मनुष्‍यों, बल्कि पशुओं में होने वाली आम बीमारियों की रोकथाम के लिए किया जाता रहा है । पारंपरिक पशु चिकित्सा हमारे पशुपालक किसानों को एक सरल, किफायती, प्रभावी एवं पर्यावरण सहायक विकल्‍प उपलब्‍ध कराता है । यह पद्धति किसानों को अधिक लाभप्रद, स्वस्थ और स्थायी डेरी मॉडल अपनाने हेतु प्रेरित करने में मदद कर रही है ।

श्री रथ ने यह बताया कि पिछले 2 वर्षों से देश के 10 से अधिक राज्‍यों में एनडीडीबी द्वारा विभिन्‍न दूध संघों एवं उत्‍पादक कंपनियों के माध्‍यम से डेरी पशुओं में होने वाली कई बीमारियों की रोकथाम के लिए इस पारंपरिक पशु चिकित्साको लोकप्रिय बनाया जा रहा है। किसानों के लाभ के लिए इस पारंपरिक पशु चिकित्‍सा पद्धति (ईवीपी) की विस्‍तार सामग्री सभी स्‍थानीय भाषाओं में विकसित की गई है । इसके परिणाम बहुत उत्‍साहजनक रहे हैं एनडीडीबी ने इसकी जानकारी विभिन्‍न अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलनों में उपलब्ध कराई है।  इस पारंपरिक पशु चिकित्‍सा पद्धि को अधिक समय तक बरकरार रखने के लिए इन नुस्खों की लगातार आपूर्ति करने की आवश्‍यकता है ताकि किसानों को इसकी संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जा सके ।

सभी हितधारकों और नीति निर्माताओं ने डेरी उद्योग में इस पारंपरिक पशु चिकित्सा (ईवीएम) को मुख्यधारा में लाने और पशु चिकित्सा विज्ञान में इसकी अहम भूमिका पर विचार-विमर्श किया। प्रो. दर्शन शंकर; डॉ सी बालचंद्रन; डॉ एएम ठाकर, अधिष्ठाता, पशु चिकित्सा विज्ञान कॉलेज, आणंद कृषि विश्वविद्यालय; प्रो. पुन्नीयामूर्थी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, वेटरनरी फार्माकोलॉजी एंड टाक्सिकोलॉजी, तनुवास, चेन्नई; डॉ गेटच्यू गेब्रू, अध्यक्ष, इथियोपियाई सोसायटी ऑफ एनिमल प्रोडक्शन, इथियोपिया; डॉ एमएनबी नायर, एमेरिटस प्रोफेसर, टीडीयू, बैंगलोर; डॉ जूलियट डेसीटेकर, इंटीग्रेटिव वेटरनरियन, बेल्जियम वेटरनरी एक्यूपंक्चर सोसाइटी, बेल्जियम; डॉ. सतीश कुमार, प्रो. एवं प्रमुख, वेटरनरी गाईनेकोलॉजीएवं आब्स्टेट्रिक्स विभाग, तनुवास, चेन्नई ने पारंपरिक पशु चिकित्सा (ईवीएम) पर अपने बहुमूल्य अनुभवों को साझा किया ।