केंद्रीय ऊर्जा तथा नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री द्वारा एनडीडीबी की ‘’सौर – डेरी किसानों की आय बढ़ाने हेतु हरित ऊर्जा का एक स्रोत’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन

केंद्रीय ऊर्जा तथा नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री द्वारा एनडीडीबी की ‘’सौर – डेरी किसानों की आय बढ़ाने हेतु हरित ऊर्जा का एक स्रोत’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन

नई दिल्‍ली, 9 जनवरी 2019: श्री राज कुमार सिंह, माननीय ऊर्जा तथा नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री, भारत सरकार ने 9 जनवरी 2019 को स्‍कोप कन्‍वेन्‍शन सेंटर में एनडीडीबी द्वारा आयोजित कार्यशाला ‘’सौर-डेरी किसानों की आय बढ़ाने हेतु हरित ऊर्जा का एक स्रोत’’ का उद्घाटन किया । श्री आनंद कुमार, सचिव, एमएनआरई, भारत सरकार, श्री दीपक गुप्‍ता, पूर्व सचिव, एमएनआरई, भारत सरकार तथा अवैतनिक महानिदेशक, भारतीय राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा महासंघ (एनएसईएफआई), तथा श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने इस अवसर पर उपस्थित होकर समारोह की शोभा बढ़ाई ।

इस कार्यशाला में एमएनआरई, नीति आयोग, एनडीडीबी तथा इसकी सहायक कंपनियों के अधिकारियों; चयनित डेरी सहकारिताओं/उत्‍पादक कंपनियों के प्रबंध निदेशक/मुख्‍य कार्यपालक अधिकारियों; टाटा पावर, इनफी कोल्‍ड, एनआईएसई से उद्योग के प्रतिनिधियों; अनुसंधान तथा परामर्शदात्री फर्मों जैसे कि केपीएमजी, अंतरराष्‍ट्रीय जल प्रबंधन संस्‍थान (आईडब्‍ल्‍यूएमआई), जीआईजेड, आईआईटी, मुंबई के अधिकारियों; बिजली वितरण कंपनियों (डिस्‍कॉम) जैसे कि महावितरण, गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल), आंध्र प्रदेश पूर्वी ऊर्जा वितरण कंपनी लिमिटेड (एपीईपीडीसीएल) के प्रतिनिधियों तथा उद्योग का प्रतिनिधित्‍व करने वाली संस्‍थाओं जैसे कि एनएसईएफआई, सोलर थर्मल फैडरेशन ऑफ इंडिया (एसटीएफआई) के प्रतिनिधियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया।

अपने उद्घाटन भाषण में माननीय केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गांव स्‍तर पर दूध संकलन बिंदु से लेकर उत्‍पाद डिलीवरी तक की पूरी डेरी वेल्‍यू चेन ऊर्जा पर आश्रित है । इस डेरी वेल्‍यू चेन में सौर ऊर्जा का व्‍यापक प्रयोग संचालन लागत को काफी कम कर सकता है तथा स्‍वच्‍छ ऊर्जा का प्रयोग सुनिश्चित करेगा । श्री राज कुमार सिंह ने कहा कि एनडीडीबी ने सहकारी नीति को बढ़ावा देने के अपने मैनडेट के तहत देश भर में डेरी सहकारिताओं का नेटवर्क बनाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा की है ।

उन्‍होंने आगे बताया कि डेरी नेटवर्क में अब लगभग 1.65 लाख गांव स्‍तरीय डेरी सहकारिताएं, 218 जिला/क्षेत्रीय/तालुका संघ तथा 24 राज्‍य डेरी महासंघ/शीर्ष दूध संघ हैं । लगभग 1.5 करोड़ दूध उत्‍पादक इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं । मार्च 2018 तक यह नेटवर्क 7.2 करोड़ लीटर प्रतिदिन की प्रसंस्‍करण क्षमता, 1.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन की प्रशीतन क्षमता तथा 3.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन की गांव स्‍तरीय बल्‍क दूध प्रशीतन क्षमता व्‍यवस्थित कर रहा है । केंद्रीय मंत्री ने किसानों के लाभ के लिए डेरी सहकारी नेटवर्क का उपयोग कर सौर ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए योग्‍य नीतिगत ढॉंचा तैयार करने की आवश्‍यकता पर जोर दिया ।
उन्‍होंने बताया कि केन्‍द्र सरकार स्‍वच्‍छ ऊर्जा का प्रयोग सुनिश्चित करने के लिए सौर पंपों को बढ़ावा दे रही है तथा साथ ही कृषि अनुदान के बोझ को कम कर रही है । ग्रिड से जुड़े सौर पंप एक विकल्‍प हैं, जो किसानों को नि:शुल्‍क जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ अतिरिक्‍त ऊर्जा को बेचकर अतिरिक्‍त आय कमाने में सहायता करेंगे ।

अपने स्‍वागत भाषण में श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने बताया कि डेरी सहकारिताओं में थर्मल ऊर्जा की आवश्‍यकता के आंशिक समाधान के लिए एनडीडीबी ने डेरी प्रसंस्‍करण संयंत्रों में कॉन्‍सन्‍ट्रेटेड सोलर थर्मल टेकनोलॉजी का प्रयोग आरंभ किया है । सीएसटी प्रसंस्‍करण संयंत्रों की वार्षिक हीट डिमांड को 5 से 15% तक कम कर सकता है । एमएनआरई तथा यूएनडीपी की पूंजीगत अनुदान सहायता से एनडीडीबी ने महाराष्‍ट्र, पंजाब, गुजरात तथा कर्नाटक के चार राज्‍यों की डेरी सहकारिताओं के प्रसंस्‍करण संयंत्रों पर 15 सीएसटी की स्‍थापना का कार्य पूरा किया है । इन स्‍थानों पर कुल स्‍थापित कलक्‍टर एरिया अपरचर एरिया का लगभग 8,000m2 है ।

गॉंव स्‍तरीय डेरी सहकारी दूध संकलन केंद्रों पर ग्रिड से जुड़े सोलर पीवी सिस्‍टम की स्‍थापना, जिनमें आवश्‍यकता के अनुसार भंडारण की सुविधा है, के सफल प्रयोग के साथ एनडीडीबी ने देश भर में सौर ऊर्जा से चलने वाली गांव सहकारिताओं का प्रचार आरंभ कर दिया है । 18 राज्‍यों है ऐसे 125 संस्‍थापनाओं के लिए राष्‍ट्रीय डेरी योजना-। के अंतर्गत सहायता प्रदान की गई तथा इसके परिणाम उत्‍साहजनक हैं । एक समान नीतिगत ढांचा तथा साथ ही उचित अनुदान सहायता से सभी गांव स्‍तरीय डेरी संचालनों को सौर ऊर्जा से चलाने में मदद मिलेगी जिससे ऊर्जा लागत में कमी आएगी तथा पर्यावरण सुरक्षा में महत्‍वपूर्ण योगदान होगा ।

श्री रथ ने बताया कि 30 सितंबर 2018 को भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने आणंद के निकट मुजकुवा गांव में एनडीडीबी द्वारा प्रोत्‍साहित सौर ऊर्जा उत्‍पादक सहकारी मंडली लिमिटेड का उद्घाटन किया । 11 किसानों ने राज्‍य द्वारा उपलब्‍ध की जा रही रियायती बिजली लेना बंद कर दिया है तथा सौर ऊर्जा को चुना है और अतिरिक्‍त ऊर्जा की आपूर्ति ग्रिड को कर रहे हैं ।

इस कार्यशाला में सौर ऊर्जा को डेरी किसानों के लिए आय के स्रोत के रूप में रेखांकित किया गया । डिसकॉम ने अपनी पहलों को साझा किया तथा सौर की संकल्‍पना को लाभप्रद फसल के रूप में प्रोत्‍साहित किया । आईआईटी, एसटीएफआई, जीआईजेड, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई), राजस्‍थान इलैक्‍ट्रॉनिक्‍स तथा इन्‍स्‍ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (आरईआईएल) तथा एनर्जी एफिसियंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) ने डेरी वेल्‍यू चेन विशेषकर कॉन्‍सन्‍ट्रेटेड सोलर थर्मल(सीएसटी), इंडस्ट्रियल हीटिंग, बल्‍क कूलिंग तथा दूध संकलन प्रणाली के प्रयोग पर अपने अनुभव साझा किए ।