श्रेष्‍ठ देशी गायों की संख्‍या में वृद्धि को एनडीडीबी ने नया आयाम दिया

श्रेष्‍ठ देशी गायों की संख्‍या में वृद्धि को एनडीडीबी ने नया आयाम दिया

आणंद, 18 जनवरी 2019: राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा आणंद में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक से बछड़े पैदा करने के लिए निर्मित अत्‍याधुनिक सुविधा में एक सप्‍ताह के अंतराल पर दो बछडि़यां - एक गिर नस्‍ल और दूसरी साहिवाल पैदा हुई हैं । इस भ्रूण उत्‍पादन तकनीक को आमतौर पर मनुष्‍यों में टेस्‍ट ट्यूब बेबी के नाम से जाना जाता है ।

इस तकनीक में, पहले एक उच्‍च गुणवत्‍ता दूध उत्‍पादन वाली श्रेष्‍ठ गाय का चयन किया गया । इन चयनित गायों को दाता (डोनर) कहा जाता है । चयनित दाता गायों से निश्चित अंतराल पर अंडाणुओं को संकलित किया जाता है । अंडाणुओं को संकलित करने की चीर-फाड़ रहित इस प्रक्रिया को ओवम पिक-अप कहा जाता है । इस प्रकार से संकलित अंडाणुओं को श्रेष्‍ठ सांड़ों के वीर्य का उपयोग करके पेट्री-डिश में निषेचित (फर्टिलाइज) किया जाता है । प्रयोगशाला में सात दिन तक विकसित होने के बाद इन भ्रूणों को कम दूध उत्‍पादन क्षमता वाली गायों (सरोगेट मदर) में प्रत्‍यारोपित किया जाता है - प्रत्‍येक सरोगेट गाय में एक भ्रूण प्रत्‍यारोपित किया जाता है । नौ महीने की गर्भावस्‍था के बाद सरोगेट मदर बछड़े को जन्‍म देती है । 2-3 सप्‍ताह के बाद दाता गाय से पुन: अंडाणुओं को संकलित किया जाता है और प्रयोगशाला में भ्रूणों का उत्‍पादन किया जाता है तथा उन्‍हें सरोगेट गायों में प्रत्‍यारोपित किया जाता है । इस प्रक्रिया को वर्ष भर में कई बार दोहराया जाता है । आमतौर पर, एक गाय से वर्ष में एक बछड़ी पैदा होती है, परन्‍तु इस तकनीक के जरिए श्रेष्‍ठ गाय से एक वर्ष में 20-25 बछड़े पैदा हो सकते हैं । इस प्रकार, इस तकनीक का इस्‍तेमाल करके सीमित संख्‍या में उपलब्‍ध हमारी उच्‍च उत्‍पादक गायों की देशी डेरी नस्‍लों जैसे गिर, साहिवाल, रेड सिंधी और थारपारकर की संख्‍या में वृद्धि की जा सकती है ।

श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि दाता एवं जीनोमिक प्रजनक मूल्‍यों पर आधारित नर के चयन के साथ इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन से हमारे पशुओं के चयन एवं प्रजनन की पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव आएगा और इससे हमारे देशी नस्‍लों की आनुवंशिक प्रगति में तेजी से कई गुना वृद्धि लाने में मदद मिलेगी । आगे, उन्‍होंने यह बताया है कि एनडीडीबी की इस सुविधा का इस्‍तेमाल पशुचिकित्‍सकों को इन-विट्रो तकनीक में प्रशिक्षित करने के लिए किया जाएगा, जो प्रशिक्षण प्राप्‍त करके इस तकनीक की जानकारी किसानों के घर तक पहुंचाएंगे । आशा है कि यह तकनीक शीघ्र ही उत्‍कृष्‍टता का केंद्र बनेगी ।

उन्‍होंने यह जानकारी दी कि हमारी इस सुविधा को स्‍थापित करने में हमने एमब्रापा (EMBRAPA), ब्राजील सरकार की एक अनुसंधान संस्‍था की मदद ली है, जिन्‍हें भारतीय मूल की गाय नस्‍लों के आईवीएफ बछडि़यों के उत्‍पादन में विशेषज्ञता हासिल है । इमब्रापा के साथ हमारे इस सहयोग से हमें ब्राजील से अच्‍छी गिर की आनुवंशिकी हासिल करने में भी मदद मिलेगी ।