डेरी सहकारिताओं की सफलता में मानव संसाधन विकास एक महत्‍वपूर्ण कारक है: अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

डेरी सहकारिताओं की सफलता में मानव संसाधन विकास एक महत्‍वपूर्ण कारक है: अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

 

आणंद, 22 जनवरी 2019: ‘’डेरी सहकारिताओं एवं उत्‍पादक संस्‍थाओं में मानव संसाधन विकास एवं प्रबंधन कार्यों का सुदृढ़ीकरण’’ पर 21 जनवरी 2019 को एनडीडीबी, आणंद में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि यह कार्यशाला डेरी सहकारिताओं के सामने आने वाली  मानव संसाधन की महत्‍वपूर्ण समस्‍याओं को समझने और उसके बाद उनके समाधान की रूप-रेखा तैयार करने में सहयोग देने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है । इस कार्यशाला में 42 से अधिक दूध संघों/महासंघों तथा उत्‍पादक कंपनियों के प्रबंध निदेशक/सीईओ ने भाग लिया ।  अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने डेरी सहकारिताओं एवं उत्‍पादक कंपनियों में मानव संसाधन विकास पर एक नियमावली (मैनुअल) भी जारी किया (इसका निर्माण एनडीडीबी द्वारा किया गया है) । यह नियमावली डेरी सहकारिताओं एवं उत्‍पादक कंपनियों को मानव संसाधन विकास की पॉलिसी एवं प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए एक रेडी रेकनर होगी ।

ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के दौरान, मुख्‍य क्रियाकलापों के विकास तथा संकलन, प्रसंस्‍करण और विपणन में कार्यकुशलता लाने पर जोर दिया गया था । श्री रथ ने बताया कि ऑपरेशन फ्लड के दौरान व्‍यापक स्‍तर पर क्षमता निर्माण के लिए विभिन्‍न नई पहल एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया था, परंतु सहकारिताओं में मानव संसाधन से संबंधित प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं को अपनाने पर ध्‍यान नहीं दिया गया था ।

अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने आगे कहा कि मानव संसाधन की प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं तथा संस्‍था की प्रभावकारिता एवं श्रेष्‍ठ निष्‍पादन के बीच एक मजबूत सहसंबंध है । यदि सहकारिताओं को अपने व्‍यवसाय में मजबूती एवं स्थिरता लानी है, तो इसके लिए उनके पास विजन, मजबूत मूल्‍य व्‍यवस्‍था और कार्य संस्‍कृति उपलब्ध होने की आवश्‍यकता है जिससे नेतृत्‍व कौशल को बढ़ावा मिले और उत्‍तम कार्य-संस्‍कृति का निर्माण हो सके ।

इस कार्यशाला में ‘’डेरी सहकारिताओं/उत्‍पादक कंपनियों में मानव संसाधन की आवश्‍यकता का मूल्‍यांकन’’  विषय पर एनडीडीबी द्वारा प्रवर्तित एवं राष्‍ट्रीय डेरी योजना-। के अंतर्गत इंस्‍टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आणंद द्वारा संचालित अध्‍ययन से प्राप्‍त निष्‍कषों पर विचार-विमर्श किया गया । इन निष्‍कर्षों से यह स्‍पष्‍ट है कि डेरी क्षेत्र में निजी एवं बहु-राष्‍ट्रीय कंपनियों की उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेषकर विपणन, अभियांत्रिकी एवं मानव संसाधन के क्षेत्र में विशिष्‍ट कौशल के साथ उचित संख्‍या में मानव संसाधकों को प्रशिक्षित करने की तत्‍काल आवश्‍यकता है । इस अध्‍ययन में इस बात को रेखांकित किया गया है कि संस्‍था में आए नए प्रवेशार्थियों को विस्‍तृत प्रशिक्षण देने के साथ उनका सामाजिक विकास करने की आवश्‍यकता है जिससे उन्‍हें सहकारिता के सिद्धांतों एवं मिशन को समझने में मदद मिलेगी । इसमें प्रभावी नियुक्ति प्रक्रियाओं को अपनाने, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण करने तथा कार्मिक नियुक्ति संबंधी  पहल करने की तत्‍काल आवश्‍यकता पर भी जोर दिया गया है ।

शिक्षा-जगत एवं उद्योग के मानव संसाधन विशेषज्ञों ने संगठनात्‍मक प्रभावशीलता एवं निष्‍पादन कौशल में वृद्धि पर मानव संसाधन विकास की विभिन्‍न पहलों/गतिविधियों के प्रभाव के बारे में अपने अनुभव साझा किए । इस बात को महसूस भी किया गया है कि डेरी सहकारिताओं/उत्‍पादक कंपनियों को इस दिशा में अधिक ध्‍यान देने के लिए मानव संसाधन विकास विभाग स्‍थापित करना चाहिए ।

खुले सत्र के दौरान इस विषय पर आगे विचार-विमर्श हुआ और एक आम सहमति यह बनी कि डेरी सहकारिताओं/उत्‍पादक कंपनियों की पॉलिसी सीमाओं के बावजूद यह आवश्‍यक है कि वे संगठनात्‍मक क्षमता निर्माण पर मानव संसाधन पहल की शुरूआत करने के लिए आगे आएं जिससे उन्‍हें लंबे समय तक सफलता प्राप्‍त करने में मदद मिलेगी ।