एनडीडीबी ने भैंस की विश्व की पहली संपूर्ण माता-पिता आधारित जीनोम असेंबली विकसित की

एनडीडीबी ने भैंस की विश्व की पहली संपूर्ण माता-पिता आधारित जीनोम असेंबली विकसित की

 

आणंद, 9 मई 2019: देशी गायों और उनकी संकर नस्लों के लिए एक विशेष जीनोटाइपिंग चिप इंडसचिप (INDUSCHIP) को सफलतापूर्वक प्रस्थापित करने के बाद एनडीडीबी ने पूर्णतः नए सिरे से नदीय भैंसों की “एनडीडीबी_एब्रो_मुर्रा” नामक जीनोम असेंबली के विकास की एक और उपलब्धि हासिल की है। जीनोम असेंबली की बेहतर शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए, पहली बार एक पूरी तरह से अलग दृष्टिकोण अपनाकर अर्थात् पिता-माता-संतान की तिकड़ी (ट्रायो बिनिंग) का उपयोग भैंस के हेप्लोटाइपों को अलग करने के लिए किया गया है। एनडीडीबी द्वारा विकसित इस जीनोम असेंबली ने 99% से अधिक जीनोम कवरेज हासिल किया है।

श्री दिलीप रथ, अध्यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि इस नवविकसित जीनोम असेंबली से भैंस जीनोम के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध होगी और भैंसों के जीनोमिक चयन कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए अपेक्षित गति मिलेगी, जिससे भारतीय भैंस की आबादी में तेजी से आनुवंशिक प्रगति हासिल होगी । यहां यह उल्लेखनीय है कि भारत के दूध उत्पादन में 50% से अधिक भैंसों का योगदान है।

पूरे विश्व में भैंस की अनुमानित आबादी 22.44 करोड़ है, जिसमें से 21.9 करोड़ (97.58%) एशिया में हैं। भारत में 11.33 करोड़ भैंस हैं, जो विश्व की कुल भैंस आबादी का लगभग 50.5 प्रतिशत है। भैंसों में चिचड़ी और कुछ अन्य रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधकता पाई जाती है। गायों की तुलना में भैंसों के दूध में अधिक फैट प्रतिशत होता है। विकासशील देशों में दूध उत्पादन के लिए भैंस को अधिक पाला जाता है । रेफरंस जीनोम के विकास से भैंसों के जैविक अंतर का पता लगाने और उनमें तेजी से आनुवंशिक सुधार करने में मदद मिलेगी ।

25 अप्रैल 2019 को ‘विश्व डीएनए दिवस’ के अवसर पर संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन डेटाबेस में एनडीडीबी के वैज्ञानिक द्वारा मुर्रा जीनोम असेंबली प्रस्तुत की गई। जीनोमिक्स के अनुसंधान में एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. माइकल शेट्ज़ के अनुसार "यह निश्चित रूप से पूरे विश्व के लिए एक मूल्यवान संसाधन होगा।" विश्व भर में भैंस में आनुवंशिक सुधार लाने के लिए यह भैंस जीनोम भारत का योगदान होगा । इस कार्य के साथ, एनडीडीबी के वैज्ञानिकों की टीम विश्व के कुछ विशिष्ट जीनोमिक अनुसंधान टीमों के समकक्ष आ गई है, जिन्होंने शुद्ध एवं हैप्लोटाइप रिजॉलब्ड जीनोम विकसित किए हैं।