दूध का फोर्टिफिकेशन भारत में कुपोषण का समाधान है: अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

 

भारत में दूध फोर्टिफिकेशन के सतत् प्रयासों पर कार्यशाला

 दूध का फोर्टिफिकेशन भारत में कुपोषण का समाधान है: अध्‍यक्ष, एनडीडीबी

 

आणंद 07 जून 2019: आज राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), आणंद में ‘’भारत में दूध फोर्टिफिकेशन के सतत् प्रयास’’ पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए श्री दिलीप रथ, अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि भारत में विटामिन ए एवं डी की व्‍यापक स्‍तर पर कमी है । विटामिन ए तथा डी के साथ उपयुक्‍त आहार का फोर्टिफिकेशन माइक्रो न्‍यूट्रीएंट (सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों) कुपोषण से निपटने की एक व्‍यवहारिक रणनीति है ।

श्री रंजन शंकर, निदेशक, द इंडिया न्‍यूट्रीशन इनिशिएटिव (टीआईएनआई); डॉ. एडवर्ड डब्‍ल्‍यू ब्रेसन्‍यान, वरिष्‍ठ कृषि अर्थशास्‍त्री, विश्‍व बैंक; श्री मधुसूदन राव, न्‍यूट्रीशन लीड, टाटा ट्रस्‍ट;    श्री विवेक अरोड़ा, वरिष्‍ठ परामर्शदाता, टाटा ट्रस्‍ट; डॉ. आर के मारवाह, वैज्ञानिक पैनल के सदस्‍य, एफएसएसएआई; डॉ. सीएस पांडव, सदस्‍य, नेशनल कॉउंसिल फॉर इंडियाज न्‍यूट्रीशन चैलेन्‍जेस, पोषण अभियान ने इस समारोह की शोभा बढ़ाई । 

अपने स्‍वागत भाषण में श्री दिलीप रथ ने यह अवगत कराया कि माइक्रोन्‍यूट्रीएंट की व्‍यापक स्‍तर पर कमी पाई जाती है और वर्तमान में पूरे विश्‍व में लगभग 200 करोड़ लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं – जो वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य बोझ का 10 प्रतिशत है । विशेष रूप से भारत के परिप्रेक्ष्‍य में, माइक्रोन्‍यूट्रीएंट कुपोषण एक मौन आपातकाल है । डब्‍ल्‍यूएचओ एवं यूनिसेफ की 2009 की रिपोर्ट के अनुसार देश में विश्‍व के एक चौथाई विटामिन ए की कमी वाले प्री-स्‍कूल बच्‍चों में एक चौथाई बच्‍चे हमारे देश के हैं ।  1.3 करोड़ से अधिक नवजात बच्‍चों में आयोडीन की कमी होने की संभावना है । राष्‍ट्रीय पारिवारिक स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5 वर्ष से कम आयु के बच्‍चों में 38.4%  बौने हैं, 21%  कमजोर और 35.7% कम वज़न वाले हैं । माइक्रो न्‍यूट्रीएंट की कमी जैसे कि आयरन, फॉलिक एसिड, विटामिन बी 12, जिंक एवं विटामिन डी की अधिक कमी देखी जा सकती है और इसका देश के जन स्‍वास्‍थ्‍य और आर्थिक उत्‍पादकता पर अधिक प्रभाव पड़ा है । इस चुनौती का सामना करने का सबसे प्रभावी उपाय खाद्य फोर्टिफिकेशन है । 

अध्‍यक्ष, एनडीडीबी ने कहा कि भारत में दूध, अपने अधिक मात्रा में उत्‍पादन, व्‍यापक वितरण नेटवर्क की उपलब्‍धता, खरीद सामर्थ्‍य एवं डेरी खाद्य आदतों की चौतरफा स्‍वीकार्यता के कारण फोर्टिफिकेशन के श्रेष्‍ठ वाहक के तौर पर उभरा है । हमारा देश विश्‍व का सबसे बड़ा दूध उत्‍पादक देश है और अब दूध की प्रतिव्‍यक्ति उपलब्‍धता बढ़कर 375 ग्राम प्रतिदिन हो गई है । दूध फोर्टिफिकेशन अधिक सस्‍ता एवं किफायती है क्‍योंकि इसकी लागत प्रति लीटर 2 से 5 पैसा से कम है । 

डॉ. ब्रेसन्‍यान ने यह बताया कि दक्षिण एशिया खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पहल (एसएएफएएनएसआई) इस दक्षिण एशियाई पहेली – उच्‍च आर्थिक विकास के बावजूद यह दीर्घकालिक कुपोषण दुसाध्‍य बना हुआ है –का समाधान करना चाहती है – जिसमें क्रासकटिंग की गतिविधि को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में काफी सुधार आएगा । उन्‍होंने इस बात का बलपूर्वक समर्थन किया कि खाद्य की गुणवत्‍ता,  न कि मात्रा, लम्‍बे समय तक स्‍वस्‍थ रहने में लोगों के लिए सहायक है । उन्‍होंने राष्‍ट्रीय डेरी योजना के क्रियान्‍वयन में भी एनडीडीबी के प्रयासों की सराहना की । 

यह दूध फोर्टिफिकेशन परियोजना विश्‍व बैंक, टाटा ट्रस्‍ट एवं राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की एक सहयोगात्‍मक पहल है । इस परियोजना का उद्देश्‍य लगभग 3 करोड़ उपभोक्‍ताओं तक पहुंचने वाले लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड तरल दूध का प्रसंस्‍करण करना है । इस परियोजना की अवधि 23 माह है । एनडीडीबी इस परियोजना के क्रियान्‍वयन हेतु विश्‍व बैंक को परामर्श सेवाएं उपलबध करा रही है । यह बोर्ड, दूध महासंघों/उत्‍पादक कंपनियों/संघों को परियोजना के क्रियान्‍वयन में तकनीकी एवं वित्‍तीय सहयोग भी प्रदान कर रहा है, जिसमें दूध के फोर्टिफिकेशन एवं परीक्षण के लिए मानक प्रचालन प्रक्रियाओं का विकास करना; दूध के फोर्टिफिकेशन के लिए गुणवत्‍ता आश्‍वासन एवं गुणवत्‍ता नियंत्रण; फोर्टिफिकेशन परीक्षणों का संचालन/प्रशिक्षण/क्षमता निर्माण तथा प्रोत्‍साहन सामग्री का विकास शामिल है । 

पिछले दो वर्षों में यह परियोजना भारत के 20 राज्‍यों के 25 दूध महासंघों/उत्‍पादक कंपनियों/संघों तक पहुंची है और परियोजना के अंतर्गत प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध का फोर्टिफिकेशन किया जा रहा है । दूध संघ/उत्‍पादक कंपनियां/संघ परियोजना के क्रियान्‍वयन एवं आंतरिक निगरानी करने तथा एनडीडीबी को नियमित तौर पर रिपोर्ट सौंपने के लिए जवाबदेह  है । एनडीडीबी द्वारा निर्धारित मानक प्रचालन प्रक्रियाओं तथा एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार फोर्टिफिकेशन किया जाएगा । स्‍वीकृत 25 परियोजना प्रस्‍तावों में से 15 दूध महासंघों/ उत्‍पादक कंपनियों/संघों ने फोर्टिफिकेशन की शुरूआत की है । 10 दूध महासंघों/उत्‍पादक कंपनियों/संघों में परीक्षण/प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और शीघ्र ही इसकी शुरूआत की जाएगी । अब तक, लगभग 10 लाख मीट्रिक टन दूध का फोर्टिफिकेशन किया जा चुका है । 

इस कार्यशाला ने विभिन्‍न कमोडिटी में फोर्टिफिकेशन पर अपने अनुभव सांझा करने के लिए विभिन्‍न प्रतिनिधियों को एक मंच प्रदान किया । आज की इस कार्यशाला से प्राप्‍त जानकारी हमारी डेरी सहकारिताओं के प्रयासों को सतत जारी रखने तथा अधिक लाभकारी परिणामों को प्राप्‍त करने के लिए दूध के फोर्टिफिकेशन और बड़े स्‍तर पर क्रियान्‍वयन के लिए निर्णय लेने में भी सहायक होगी ।