पात्रता मानदंड

पात्रता मानदंड

एनडीपी I को ईआईए द्वारा उन राज्यों में कार्यान्वयन किया जाएगा जहां संबंधित राज्य सरकारें इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए वातावरण बनाने हेतु आवश्यक विनियामक/नीति सहायता के लिए वचनबद्ध होंगी। राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले विनियामक/नीति सहायता समर्थन इस प्रकार होगाः

  • उचित प्रजनन नीति का होना ।
  • कृत्रिम गर्भाधान सेवाएँ लघु पशु चिकित्सा सेवा (एम वी एस) के अंतर्गत अधिसूचित न किया गया हो।
  • कृत्रिम गर्भाधान सेवा के मूल्य को धीरे-धीरे बढ़ाना ताकि इसमें पूरी लागत आ जाए।
  • राज्य में कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य केवल ए तथा बी श्रेणी के वीर्य केन्द्रों से प्राप्त करना।
  • सभी प्रजनन गतिविधियों के लिए डीएडीएफ (DADF) द्वारा जारी सामान्य विज्ञप्ति तथा एसओपी को अपनाना।
  • पशु अधिनियम (2009) में संचारी और संक्रामक रोगों के निवारण तथा नियंत्रण के अधीन राज्य नियमों को अधिसूचित करना।

एनडीपी I  के अंतर्गत भाग लेने वाली अंतिम कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए पात्रता मानदंडः-

एनडीपी I के अंतर्गत प्रत्येक ईआईए का चयन विशिष्ट पात्रता मानदंड के आधार पर किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत ईएआई की चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगीः-

  • पहले चरण में भाग लेने के लिए ईआईए की पात्रता निर्धारित की जाएगी और यदि ईआईए इस पात्रता मानदंड को पूरा करता है तो एक उप परियोजना प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और उनके द्वारा इसे पीएमयू को प्रस्तुत किया जाएगा।
  • द्वितीय चरण में, मूल्यांकन के लिए दिशा-निर्देश के आधार पर पीएमयू  उप परियोजना प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगा।

संस्थागत/शासन मानदंड

  • एक विधिवत रूप से गठित संचालक मंडल होना चाहिए जैसे कि निदेशक मंडल/न्यासी मंडल/ गठबंधन समिति जो ईआईए को कानूनी रूप से लागू होता हो।
  • उप परियोजना के पारदर्शी और प्रभावी कार्यान्वयन, पर्यवेक्षण और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी/ प्रबंध निदेशक(या समतुल्य) तथा योग्य तकनीकी एवं प्रबंधकीय कर्मियों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए।

वित्तीय मानदंड-

  • खातों की लेखा परीक्षा नवीनतम होनी चाहिए तथा लेखा परीक्षक की कोई भी प्रतिकूल राय या अस्वीकरण नहीं होना चाहिए।
  • किसी भी वित्तीय संस्था का अतिदेय नहीं होना चाहिए।

नोटः नवगठित संस्थाओं के संदर्भ में, जो अन्यथा योग्य पाई गई हों, उपरोक्त मानदंड तब तक लागू नहीं होंगे जब तक वे अपना पहला वित्तीय वर्ष पूर्ण नहीं कर लेती।

विभिन्न घटकों/उप घटकों/गतिविधियों के लिए तकनीकी मानदंडः-

संतति परीक्षण के माध्यम से उच्च अनुवांशिक योग्यता वाले गोवंश और भैंस,सांड का उत्पादन के लिए तकनीकी मानदंड

  • संतति परीक्षण कार्यक्रम के लिए पहचान की गई नस्लें, मुर्रा/उन्नत मुर्रा भैंस, मेहसानी भैंस, शुद्ध एचएफ, एचएफ संकर, जर्सी संकर और सुनंदिनी, यदि संबंधित मूल प्रदेश में इन व्यस्क प्रजनक मादा पशुओं की मौजूदा संख्या कम से कम 1,00,000 हो ।
  • गोवंश या भैंस की किसी भी नस्ल के परीक्षण के लिए प्रत्येक समूह में न्यूनतम दस सॉंडों की कार्य क्षेत्र की स्थिति में संतति परीक्षण कार्यक्रम कार्यान्वयन करने का अनुभव।
  • डीएडीएफ के संतति परीक्षण के निर्धारित मानकों (भारत सरकार, एमओए, डीएडीएफ, पत्र एफ नं. 3-13/2008-AHT (NPCBB) दिनांक 19 जनवरी 2010) का पालन कर सॉंड उत्पादन के लिए एक ठोस योजना बनाने और उसे अमल में लाने की क्षमता।
  • ईआईए के पास ‘ए’ या ‘बी’ वर्गीकृत वीर्य केन्द्र होना चाहिए अथवा भारत सरकार के केन्द्रीय निगरानी इकाई (सीएमयू) द्वारा उनकी नवीनतम मूल्यांकन में ‘ए’ या ‘बी’ वर्गीकृत वीर्य केन्द्र के साथ व्यवस्था होनी चाहिए। यह व्यवस्था परीक्षण के लिए आवश्यक सॉंडों की संख्या रखने तथा परीक्षण के लिए रखे गए सॉंडों से परीक्षण अंश की आवश्यक संख्या प्राप्त करने के लिए जरूरी है।
  • निश्चित किए गए क्षेत्र में कृत्रिम गर्भाधान परीक्षण करने के लिए या तो चल कृत्रिम गर्भाधान तकनीकविद का प्रसार होना चाहिए अथवा किसी स्थापित कृत्रिम गर्भाधान सेवा प्रदात्ता जिसके पास चल कृत्रिम गर्भाधान तकनीकविद हो के साथ व्यवस्था होनी चाहिए।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जाएगी जिनके पास पहले से ही आईटी आधारित रिपोर्टिंग तथा निगरानी प्रणाली हो।

नस्ल चयन कार्यक्रम द्वारा उच्च आनुवांशिक योग्यता वाले गोवंश तथा भैंस सांडों के उत्पादन के लिए तकनीकी मानदंडः

  • नस्ल चयन कार्यक्रम के लिए पहचानी गई नस्लों में राठी, कांकरेज, थारपारकर, हरियाना, गीर तथा साहीवाल नस्ल के गोवंश तथा जाफराबादी, नीली रवि तथा पंढरपुरी नस्ल की भैंसें हैं पर संबंधित मूल प्रदेश में उस नस्ल के व्यस्क प्रजनक मादा पशुओं की मौजूदा संख्या कम से कम 50,000 हो।
  • कार्यक्षेत्र में गोवंश या भैस सॉंडों की नस्ल विकास कार्यक्रमों को लागू करने का कम से कम पांच साल का अनुभव हो।
  • उन ईआईए को वरीयती दी जायेगी जिनके पास पहले से ही आईटी आधारित रिपोर्टिंग तथा निगरानी प्रणाली हो।

मौजूदा वीर्य केन्द्रों को मजबूत करने/नए वीर्य केन्द्र स्थापित करने के लिए तकनीकी मानदंडः

  • भारत सरकार के केन्द्रीय निगरानी इकाई(सी एम यू) द्वारा उसके नवीनतम मूल्यांकन में ‘ए’ या ‘बी’ वर्गीकृत वीर्य केन्द्र तथा आवश्यक जमीन (भार रहित) तथा सुविधाओं के विस्तार के लिए सहायक बुनियादी ढांचा।
  • मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) (डीएडीएफ भारत सरकार-अप्रैल 2005 द्वारा निर्धारित) का सख्ती से अनुकरण करने की क्षमता और रोग मुक्त वीर्य अंशों का उत्पादन करने के लिए पर्याप्त जैव सुरक्षा उपाय मौजूद हों।
  • प्रत्येक खरीददार से वीर्य अंशों के वास्तविक उपयोग का आंकडा प्राप्त करने की क्षमता।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जायेगी जिनके पास आईटी आधारित रिपोर्टिंग तथा निगरानी प्रणाली पहले से ही है।
  • इन परियोजना के अंतर्गत स्थापित किए जानेवाले नए वीर्य केन्द्र के लिए निर्धारित विज्ञप्ति और मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुकरण करते हुए वार्षिक न्यूनतम 1 करोड़ गुणवत्ता वाले रोग मुक्त वीर्य अंश उत्पादन करने की क्षमता होनी चाहिए। इन आवश्यकताओं के अनुरूप एक ईआईए कोः
  • पूंजी निवेश का 25 प्रतिशत योगदान करने की क्षमता हो।
  • केन्द्र स्थापित करने के लिए 200 एकड़ की भार मुक्त जमीन स्वयं की या दीर्घकालीन पट्टे पर ली गई हो।
  • ईएसएमएफ की आवश्यकताओं को संतुष्ट करे
  • प्रत्येक खरीददार से वीर्य डोज़ के वास्तविक उपयोग का आंकडा प्राप्त करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • निर्धारित विज्ञप्ति और मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुकरण करते हुए न्यूनतम 1 करोड़ उच्च गुणवत्ता वाली रोग मुक्त वीर्य अंशों को उत्पन्न करने की क्षमता वाले नए वीर्य केन्द्र के सफल प्रबंधन की क्षमता होनी चाहिए।
  • ऐसे ईआईए को वरीयता दी जाएगी जो वर्तमान में सीएमयू द्वारा ‘ए’ वर्गीकृत बड़े वीर्य केन्द्र का प्रबंधन कर रहा हो या ऐसी किसी संस्था के साथ तकनीकी और प्रबंधकीय मार्गदर्शन/सहायता के लिए यथोचित सहकार्य/व्यवस्था हो।

स्पष्टीकरणः राष्ट्रीय संचालन समिति ने दिनांक 20 फरवरी 2013 की अपनी चौथी बैठक में नियोजित दो नए बड़े वीर्य स्टेशनों के निवेश को पहले से मौजूद ए एवं बी श्रेणी के वीर्य स्टेशनों में पुर्नविनियोजित किया है।

आहार संतुलन कार्यक्रम के लिए तकनीकी मानदंडः

  • पशु चारा, खनिज मिश्रण के उत्पादन और आपूर्ति के लिए ईआईए का खुद का कारखाना होना चाहिए अथवा इन उत्पादों की उपलब्धि  लिए  किसी उत्पादक के साथ आश्वासित  समझौता होना चाहिए।
  • ईआईए के पास निर्दिष्ट पाठ्यक्रम के अनुसार सभी ग्रामीण एलआरपी को प्रशिक्षण प्रदान करने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जाएगी जिसके पास पहले से आईटी आधारित रिपोर्टिंग और निगरानी प्रणाली है।

चारा बीज प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के लिए तकनीकी मानदंडः

  • ईआईए को प्रमाणित/सत्यता के लेबल लगे चारा बीज का उत्पादन/अधिप्राप्ति का अनुभव होना चाहिए।
  • ईआईए के पास चारा बीज प्रसंस्करण के लिए ठोस योजना बनाने तथा लागू करने और बीज अधिप्राप्ति और प्रक्रमण के लिए एसओपी के कड़ाई से अनुकरण की क्षमता होनी चाहिए।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जायेगी जिनके पास पहले से आईटी आधारित रिपोर्टिंग तथा निगरानी प्रणाली है।

साइलेज उत्पादन करने के प्रदर्शन में भाग लेने की मानदंड पात्रताः

चारा फसलः मक्का, जुवार, बाजरा और जई

  • ईआईए के पास ग्रामीण स्तर के कृषक संगठनों जैसे ग्रामीण डेरी सहकारी समितियां, दुग्ध उत्पादक संस्थाएं तथा स्वयं सहायता समूह का प्रसार होने चाहिए। साथ ही कार्यक्षेत्र स्तर पर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रदर्शनों का आयोजन करने का अनुभव होना चाहिए।
  • ईआईए के पास प्रदर्शनों के लिए एक ठोस योजना बनाने और कार्यान्वयन करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • ऐसे ईआईए को वरीयती दी जाएगी जिन्हें इस क्षेत्र में पहले से ही अनुभव है।

घास काटने की मशीन के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए तकनीकी मानदंड

  • ईआईए की उन किसानों तक पहुंच होनी चाहिए जो सामूहिक रूप में करीब 400 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध करा सकते हों जहां आमतौर पर फसलों की संयुक्त कटाई की जाती हो और जो फसल अवशेषों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध हो।
  • ईआईए के पास प्रदर्शनों की ठोस योजना बनाने तथा कार्यान्वयन की क्षमता होनी चाहिए।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जायेगी जिनके पास पहले से ही इस क्षेत्र में अनुभव हो।

चारा अवशेष संवर्धन और सघनीकरण में भाग लेने के लिए तकनीकी मानदंडः

  • ईआईए के पास चारा अवशेष संवर्धन और सघनीकरण के लिए एक ठोस योजना बनाने तथा उसके कार्यान्वयन की क्षमता होनी चाहिए।
  • उन ईआईए की वरीयता दी जाएगी जिनको इस क्षेत्र का पूर्व अनुभव हो।

जैव भार भंडारण साइलो में भाग लेने के लिए तकनीकी मानदंड

  • ईआईए के पास गांव स्तर के किसान संगठन जैसे ग्रामीण डेरी सहकारी समितियां, दुग्ध उत्पादक संस्थाएं तथा स्वयं सहायता समूह का प्रसार होना चाहिए। इसके अलावा उत्पादन वृद्धि की सेवाएं प्रदान करने का अनुभव होना चाहिए तथा अधिशेष क्षेत्र से कमी वाले क्षेत्र में सूखे चारे का परिवहन में रुचि होनी चाहिए।
  • ईआईए के पास भंडारण साइलो स्थापित करने के लिए भार मुक्त जमीन होनी चाहिए।
  • ईआईए के पास चारा अवशेष संवर्धन और सघनीकरण के लिए एक ठोस योजना बनाने तथा कार्यान्वयन करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जाएगी जिनके पास इस क्षेत्र का पूर्व अनुभव हो।

गांव आधारित दूध अधिप्राप्ति कार्यप्रणाली के लिए तकनीकी मानदंड

अ : डेरी सहकारी समितियां

  • पूंजी निवेश का 50 प्रतिशत योगदान देने की इच्छा और क्षमता होनी चाहिए।
  • उत्पादकों को सहकारी समितियों में संगठित करने, दुग्ध संग्रह में पारदर्शिता, दूध की गुणवत्ता का परीक्षण तथा सदस्यों/उत्पादकों को समय पर भुगतान करने का अनुभव प्रदर्शित किया होना चाहिए।
  • स्वयं की दूध प्रसंस्करण सुविधाएं अथवा मौजूदा दूध प्रसंस्करण सुविधा के साथ एक अग्रगामी संबंध होना चाहिए।
  • थोक दूध शीतकों को स्थापित करने के लिए भार मुक्त भूमि/परिसर होना चाहिए।
  • गांव आधारित दूध अधिप्राप्ति प्रणाली के दिशा निर्देशों का अनुकरण करते हुए दूध अधिप्राप्ति के लिए एक ठोस योजना के कार्यान्वयन की क्षमता होनी चाहिए।
  • सकारात्मक निवल मूल्य होना चाहिए।
  • उन ईआईए को वरीयता दी जाएगी, जिनके पास पहले ही आईटी आधारित रिपोर्टिंग तथा निगरानी प्रणाली मौजूद है।

ब : उत्पादक कंपनियां

  • आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों में स्थित सदस्य दूध उत्पादक संस्थाओं से दूध खरीदना चाहिए (जहां देश का 50 प्रतिशत से अधिक दूध उत्पादन होता है)
  • कम से कम 20,000 30,000 दूध डालने वालों से औसत वार्षिक दूध अधिप्राप्ति एक लाख किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक होनी चाहिए।
  • संस्था के अंतर्नियम में सक्रिय सदस्यता, संरक्षण आधारित लाभ, संरक्षण आधारित मतदान के अधिकार का प्रावधान होना चाहिए (शर्त के अधीन किसी भी सदस्य के पास उत्पादक कंपनी का कुल वोट का 0.5 फीसदी से अधिक का मतदान अधिकार नहीं होगा)
  • थोक दूध शीतक स्थापित करने के लिए विवाद मुक्त जमीन/परिसर होना चाहिए।
  • उत्पादक कंपनी के कुल निदेशकों के पांचवें हिस्से (1/5th) के बराबर सहयोजित किए हुए विशेषज्ञ शामिल होने चाहिए।
  • एक या एक से अधिक राज्य की सदस्यता हो सकती है।
  • उन उत्पादक कंपनियों को वरीयता दी जायेगी ,जिनके पास संरक्षण आधारित पूंजीवादी सदस्य जुटाने की प्रणाली हो ।