संक्षेप में डीआईडीएफ

डीआईडीएफ - डेरी प्रसंस्‍करण एवं बुनियादी ढ़ांचा विकास निधि 

भारतीय डेरी सहकारिताओं के लिए ऑपरेशन फ्लड के दौरान बड़ी संख्‍या में डेरी प्रसंस्‍करण संयंत्रों की कमिशनिंग की गई थी । आपरेशन फ्लड 1996 में समाप्त हुआ था जिसके बाद इनमें से अधिकतर संयंत्रों का कभी भी विस्‍तार तथा/अथवा आधुनिकीकरण नहीं किया गया है । ये संयंत्र पुरानी एवं अप्रचलित प्रौद्योगिकियों से संचालित किए जा रहे हैं जो वर्तमान में उपलब्‍ध आधुनिक प्रौद्योगिकियों की तुलना में ऊर्जा दक्ष नहीं होंगे । कार्य दक्षता में सुधार लाने तथा उच्‍च मूल्‍यवर्धित उत्‍पादों की उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए इन डेरी संयंत्रों को बदलने और उनका आधुनिकीकरण करने की आवश्‍यकता है ।

उत्‍पादकों एवं उपभोक्‍ताओं दोनों के हितों को ध्‍यान में रखते हुए, डेरी सहकारिताएं बिक्री से प्राप्ति का अधिकतम हिस्‍सा (सामान्‍यत: 75-80%) दूध उत्‍पादकों को देती हैं और किफायती दर पर उपभोक्‍ताओं को सुरक्षित दूध उपलब्‍ध कराती हैं । फलत: वे डेरी प्रसंस्‍करण बुनियादी ढ़ांचे के आधुनिकीकरण तथा/अथवा विस्‍तार में निवेश करने में असमर्थ हैं क्‍योंकि कम लाभप्रदता के कारण तुलनात्‍मक रूप से उनके पास सीमित संसाधन हैं । यह सुनिश्चित करने के लिए कि डेरी सहकारी समितियाँ किसानों के निरंतर लाभ के लिए प्रतिस्पर्धी रहें, भारत सरकार ने दिसंबर 2017 में नाबार्ड के तहत कुल रु. 10,881 करोड़ परिव्यय के साथ डेरी प्रसंस्‍करण एवं बुनियादी ढ़ांचा विकास निधि के निर्माण की घोषणा की थी । योजना के तहत, 2017-18 से 2019-20 की अवधि के दौरान डेरी प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए रु. 8004 करोड़ की एक कोष की स्थापना की गई है । शेष परिव्यय में, रु. 2001 करोड़ अंतिम ऋणियों का योगदान होगा, रु. 12 करोड़  राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) / राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) का योगदान होगा एवं  डीएएचडी, भारत सरकार  द्वारा रु. 864 करोड़ ब्याज सहायता के लिए योगदान दिया जाएगा ।

फरवरी 2020 में, आर्थिक मामलों की मंत्री मंडलीय समिति (सीसीईए) ने 2017-18 से 2019-20 की वित्त पोषण  अवधि को "2018-19 से 2022-23" तक संशोधन को स्वीकृति प्रदान की है । सीसीईए ने ब्याज सहायता के दर में "2% प्रतिवर्ष." से "2.50% प्रतिवर्ष" तक संशोधन को भी स्वीकृत किया है, जिसके कारण डीएएचडी  द्वारा योगदान की जाने वाली ब्याज सहायता राशि रु. 864 करोड़ से बढ़कर रु. 1167 करोड़ हो गयी है ।  रु. 1167 करोड़ का आवंटन ब्याज सहायता के लिए नाबार्ड को 2018-19 से 2030-31 तक 13 साल की अवधि में पूरे ऋण भुगतान अवधि के लिए जारी किया जाएगा । नाबार्ड राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को प्रतिवर्ष 6% की रियायती दर पर ऋण प्रदान करेगा। एनडीडीबी / एनसीडीसी आगे ऋणियों को 6.50% के ब्याज दर पर डेरी बुनियादी ढांचा निर्माण हेतु ऋण देगी जिनमें राज्य डेरी सहकारी महासंघ, जिला दुग्ध संघ, बहु राज्यीय सहकारी समितियाँ, एनडीडीबी की सहायक कंपनियाँ, दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ सम्मिलित हैं। हालांकि, भविष्य में, यदि नाबार्ड के लिए धन की लागत में कोई वृद्धि होती है, तो अतिरिक्त ब्याज अंतिम ऋणियों द्वारा वहन किया जाएगा । अंतिम ऋणी को दो वर्षों की अधिस्थगन अवधि सहित दस वर्षों में ऋण चुकाना होगा ।

योजना का उद्देश्‍य - निम्नदलिखित उद्देश्योंड से इस योजना का निर्माण किया गया है:

  • दूध प्रसंस्‍करण संयंत्रों एवं मशीनरी का आधुनिकीकरण करना और अधिक दूध प्रसंस्‍करण हेतु अतिरिक्‍त बुनियादी ढ़ांचे का निर्माण करना ।
  • अधिक से अधिक दुग्ध उत्‍पादों के उत्‍पादन के जरिए मूल्य संवर्धन लाने हेतु  अतिरिक्‍त दूध प्रसंस्‍करण क्षमता का निर्माण करना । 
  • डेरी प्रसंस्‍करण संयंत्रों/उत्‍पादक स्‍वामित्‍व वाली एवं नियंत्रित डेरी संस्‍थाओं की कार्यदक्षता को बढ़ाकर दूध उत्‍पादक किसानों को दूध का अधिकतम मूल्‍य दिलाना और उपभोक्‍ताओं को गुणवत्‍तायुक्‍त दूध की आपूर्ति करना ।
  • उत्‍पादक स्‍वामित्‍व एवं नियंत्रित संस्‍थाओं को उनके दूध की हिस्‍सेदारी को बढ़ाने के लिए मदद करना और इसके द्वारा संगठित दूध बाजार में ग्रामीण दूध उत्‍पादकों को स्‍वामित्‍व, प्रबंधन और बाजार की पहुंच के व्‍यापक अवसर प्रदान करना ।
  • संगठित तरल दूध बाजार में उत्‍पादक स्‍वामित्‍व एवं नियंत्रित संस्‍थाओं को शीर्ष स्थान प्राप्त करने तथा दूध उत्‍पादकों को अधिक मूल्‍य प्रा‍प्‍त कराने में मदद करना ।

योजना क्षेत्र - यह योजना पूरे देश में लागू की जाएगी ।

 

 

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