केंद्रीय बजट 2026-27 सहकारी डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ विकसित भारत 2047 के विज़न को आगे बढ़ाएगा: अध्यक्ष, एनडीडीबी

केंद्रीय बजट 2026-27 सहकारी डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ विकसित भारत 2047 के विज़न को आगे बढ़ाएगा: अध्यक्ष, एनडीडीबी
01 फरवरी 2026, आणंद: राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने केंद्रीय बजट 2026–27 को वास्तव में परिवर्तनकारी बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि इसमें किसानों की आय बढ़ाने, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने से संबंधित पहलें शामिल हैं तथा ये पहलें ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को साकार करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
कृषि एवं सहायक गतिविधियों की विकास-इंजन के रूप में पहचाने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र, जो ग्रामीण परिवारों को आजीविका उपलब्ध कराता है, को केंद्रीय बजट 2026–27 में बड़ा प्रोत्साहन मिला है। इसके लिए 6,153.46 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16% अधिक है। बजट में 500 करोड़ रुपये की एकीकृत उद्यमिता विकास योजना की भी घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य ऋण-आधारित सब्सिडी के माध्यम से रोजगार का विस्तार करना, पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण करना, एकीकृत डेयरी एवं पोल्ट्री वैल्यू चैन का निर्माण करना तथा पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देना है, जिससे उद्यमिता और ग्रामीण विकास को बल मिलेगा।
उन्होंने बताया कि बजट के तहत 20,000 पशु चिकित्सा पेशेवरों को जोड़ा जाएगा और ऋण-आधारित सब्सिडी योजना के माध्यम से नए पशु चिकित्सा एवं पैरा-वेट कॉलेजों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं को समर्थन दिया जाएगा। भारत के 53 करोड़ पशुधन, जिसमें 30 करोड़ दुधारू पशु शामिल हैं, को लक्षित करते हुए यह पहल नवाचार को गति देने के लिए वैश्विक सहयोग को भी प्रोत्साहित करती है। डॉ. मीनेश शाह ने इसे इस क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बताया।
डॉ. शाह ने बताया कि प्राथमिक सहकारी समितियों को मिलने वाली कर छूट, जो अब तक दूध, तिलहन, फल एवं सब्जियों की आपूर्ति तक सीमित थी, उसे पशु आहार तक विस्तारित किया गया है। प्राथमिक सहकारिताएं प्रतिवर्ष लगभग 102 लाख मीट्रिक टन पशु आहार का विक्रय करती हैं; इस कदम से उनका कर भार उल्लेखनीय रूप से घटेगा और किसान सदस्यों को बेहतर लाभ सुनिश्चित होगा। भारत की डेयरी सहकारिताएं पहले ही उपभोक्ता द्वारा दिए गए प्रत्येक रुपये का 75% से अधिक हिस्सा उत्पादकों को लौटाती हैं; यह पहल भुगतान को और बढ़ाएगी, जिससे सीधे किसानों के हाथों में अधिक धन पहुंचेगा।
एनडीडीबी के अध्यक्ष ने बजट में किए गए उस प्रावधान का स्वागत किया, जिसके तहत नई कर व्यवस्था के अंतर्गत अंतर-सहकारी समितियों से प्राप्त लाभांश आय को, यदि उसे आगे अपने सदस्यों को वितरित किया जाता है, तो कटौती के रूप में मान्य किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत बहु-राज्य सहकारी संस्थाओं में निवेश को प्रोत्साहित करेगा। इसके अतिरिक्त, अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी महासंघों द्वारा 31.01.2026 तक कंपनियों में किए गए निवेश से प्राप्त लाभांश आय को, यदि उसे आगे सदस्य सहकारी संस्थाओं को वितरित किया जाता है, तो उस पर तीन वर्षों की कर-छूट प्रदान करने का प्रावधान उनकी लाभप्रदता को और सुदृढ़ करेगा तथा सदस्य संस्थाओं को अधिक भुगतान सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
केंद्रीकृत बायो-सीएनजी मॉडल डेयरी अपशिष्ट को स्वच्छ परिवहन योग्य ईंधन और जैविक उर्वरक में परिवर्तित करता है, जिससे सर्कुलर इकोनोमी के लक्ष्यों को बढ़ावा मिलता है। केंद्रीय बजट की घोषणा के अनुसार, बायोगैस-मिश्रित सीएनजी पर देय केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के संपूर्ण मूल्य को बाहर रखा जाएगा। इससे देशभर में बड़े बायो-सीएनजी मॉडलों के विस्तार को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा, सस्टेनेबिलिटी को मजबूती मिलेगी और जैविक उर्वरक उप-उत्पादों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
संक्षेप में, एनडीडीबी के अध्यक्ष ने केंद्रीय बजट 2026–27 को ऐसा बजट बताया जो सभी प्रमुख अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। उन्होंने कहा कि यह बजट कृषि, डेयरी एवं संबद्ध क्षेत्रों को आवश्यक गति प्रदान करता है, पूंजी दक्षता में सुधार करता है, सहकारी संस्थाओं से संबंधित कर-विसंगतियों को कम करता है तथा इस प्रकार किसानों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने में सहायक होगा।

